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‘आश्रम-छात्रावास में रहने वाले बच्चों को बेहतर वातावरण, सुविधा व सुरक्षा देने हरसंभव प्रयास करें‘

‘आश्रम-छात्रावास में रहने वाले बच्चों को बेहतर वातावरण, सुविधा व सुरक्षा देने हरसंभव प्रयास करें‘

कलेक्टर क्षीरसागर ने छात्रावास अधीक्षकों की बैठक लेकर दिए निर्देश

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कांकेर// कलेक्टर नीलेश महादेव क्षीरसागर ने आज आदिवासी विकास विभाग के तहत जिले में संचालित आश्रमों एवं छात्रावासों के अधीक्षकों की बैठक लेकर उपलब्ध सुविधाओं तथा आधारभूत संसाधनों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आश्रम एवं छात्रावासों में निवासरत बच्चों को बेहतर वातावरण देने तथा परिसरों में आवश्यक सुविधाओं व सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने हेतु हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि इसमें किसी प्रकार की कोताही अथवा लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला कार्यालय परिसर में स्थित संयुक्त भवन के सभाकक्ष में आज सुबह 11.30 बजे आयोजित बैठक में कलेक्टर ने अलग-अलग बिंदुओं पर चर्चा कर जिले के आश्रम व छात्रावासों की स्थिति की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने निर्देशित किया कि सभी छात्रावासों में रिक्त शत-प्रतिशत सीटों पर विद्यार्थियों को प्रवेश दें। इसके लिए छात्रावास अधीक्षकों को व्यक्तिगत रुचि लेते हुए पालकों से सतत् संपर्क कर उन्हें प्रोत्साहित करने तथा छात्रावासों में अनुकूल वातावरण निर्मित करने के लिए सार्थक प्रयास एवं पहल करने की बात कलेक्टर ने कही। इसके अलावा कलेक्टर ने छात्रावास परिसर में अतिजर्जर हो चुके भवनों का डिस्मेंटल करने हेतु प्रस्ताव तैयार कर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास को प्रेषित करने के निर्देश दिए। इसी तरह जिन छात्रावास कैम्पस में हाईटेंशन विद्युत तार एवं ट्रांसफार्मर जैसे जोखिम भरे उपकरणों को परिसर से हटाने के लिए भी प्रस्ताव तैयार कर उच्च कार्यालय को सूचित करने के निर्देश छात्रावास अधीक्षकों को दिए। जहां नवीन भवन बन चुके हैं उन्हें तत्काल आधिपत्य में लेकर कक्षाएं संचालित करने के लिए भी उन्होंने निर्देशित किया। कलेक्टर ने जिले के आश्रमों एवं छात्रावासों को और अधिक अनुकूल और बेहतर बनाने के लिए नवाचार करने हेतु अधीक्षकों को प्रोत्साहित किया। साथ ही आदर्श छात्रावास के तौर पर उन्हें विकसित करने अतिरिक्त संसाधन की मांग उच्च कार्यालय से करने की बात भी कहीं। उन्होंने सभी अधीक्षकों को बिना अनुमति के छात्रावास नहीं छोड़ने, प्रतिदिन भोजन की गुणवत्ता परखने, बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने व सुरक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के भी सख्त निर्देश दिए। इसके अलावा बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तत्काल दुरूस्त कराने, स्नानगृह, शौचालय, बोरवेल्स, स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था करने और आश्रम-छात्रावास परिसर में किचन गार्डन व वृक्षारोपण करने के लिए भी सभी अधीक्षकों को कलेक्टर ने निर्देशित किया। इसके अतिरिक्त विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर कलेक्टर ने चर्चा की तथा आश्रम-छात्रावासों को और अधिक बेहतर बनाने अधीक्षकों से फीडबैक लिया।
इसके पहले, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास एल.आर. कुर्रे ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कुल 198 आश्रम-छात्रावास संचालित हैं, जिनमें 121 छात्रावास, 76 आश्रम शाला सम्मिलित हैं। इनमें 20 पोस्ट मैट्रिक छात्रावास हैं, जहां 10 बालक और 10 कन्या छात्रावास हैं। इसी तरह 101 प्री-मैट्रिक छात्रावास संचालित हैं, जिनमें 71 बालक और 30 कन्या छात्रावास शामिल हैं। इसी तरह 76 आश्रमों में से 43 बालक और 34 कन्या आश्रम तथा 01 अशासकीय संस्था भी संचालित हैं। कलेक्टर ने जिले में अधीक्षक के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए शासन स्तर पर पत्राचार करने के लिए सहायक आयुक्त को निर्देशित किया। बैठक में सभी ब्लॉक के मण्डल संयोजक तथा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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