राणी सती दादी जी का जन्म दिवस भादो अमावस्या धूमधाम से मनाया गया।

राणी सती दादी जी का जन्म दिवस भादो अमावस्या धूमधाम से मनाया गया

गोपाल सिंह विद्रोही//प्रदेश खबर प्रमुख छत्तीसगढ़//विश्रामपुर सूरजपुर -अग्रबंधुओ के कुलदेवी रानी सती का अमावस्या भादो अमावस्या के अवसर पर स्थानीय अग्रवाल अग्रसेन भवन में भाव सुंदर मंगल पाठ का आयोजन किया गया जिसमें अग्र बंधुओ की धर्मपत्नियों ने भारतीय नारी सुहागिन वेशभूषा में सम्मिलित हो कर मंगल पाठ किया ।
उक्त मंगल पाठ में संबलपुर उड़ीसा के भजन कीर्तन कृष्ण भजन कीर्तन मंडली ने अपनी पूरी टीम के साथ संगीत में दादी मां सती की भजन कीर्तन से पूरा समा बांध दिया। इस आयोजन में आगरा समाज के सुभाष गोयल एवं विजय गोयल ने भी रानी सती की आरती उतारी महिलाओं ने भी दादी का आरती उतारी एवं भजन कीर्तन में सम्मिलित हुई।
इस संबंध में दादी रानी सती के संबध में समाज के श्रीमति अनिता गोयल ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत काल में अभिमन्यु वध के दौरान उनकी पत्नी उतरा को वरदान स्वरूप पुनः रानी सती के रुप मे कलयुग में जन्म हुआ था। सती दादी जी आज से लगभग 715 वर्ष पूर्वा मंगलवार नवमीं वर्ष 1352 ईस्वीं 6 दिसंबर 1295 के सती हुई थीं। अनिता गोयल ने आगे बताया की दादी रानी सती का जन्म कार्तिक शुक्ला नवमीं दिन मंगलवार रात 12 बजे के पश्चात डोकवा गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम सेठ श्री गुरसामल था। इन्होने आगे बताया कि एक युद्ध के दौरान नारायणी देवी(रानी सती) के पति की मौत हो जाती है जिसके बाद वे सती हो जाती है। धीरे-धीरे लोग इन्हें आदि शक्ति का रूप मनाने लगे । रानी सती दादी अग्रवाल बंधुओ का कुल देवी है तब से रानी सती के रूप में पूजा होती है। ।महारानी सती के पति तंधन दास को हत्या कर नवाब ने उनका सफ़ेद घोड़ी को लूट लिया इस दौरान दादी नारायणी देवी और उनकी घोड़ी के अलावा उनका वफादार नौकर ही बचा रह बाद मे नारायणी ( रानी सती)ने अग्नि स्नान कर लिया ।
बहरहाल भादो आमस्या पर अग्रवाल महिलाओं ने घूम धाम से मंगल पाठ किया तथा सामूहिक भोज में शामिल हुई। इस आयोजन को सफल बनाने में सरली गर्ग ,उमा दानोदिया, प्रीति गोयल, ज्योति सिंघल, सोनू गोयल, विजय गोयल , रश्मि गर्ग, वर्षा मित्तल ,उमा गोयल ,अनीता गोयल आदि शामिल थी ।अग्रवाल महिलाओं ने इस दौरान विभिन्न प्रजाती के वृक्षों का एक पेड़ मां के नाम के तहत पौधारोपण किया। इस तरह रानी सती की भादो अमावस्या पर धूमधाम से कई धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।

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