लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व है महान : उपमुख्यमंत्री अरूण साव

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का व्यक्तित्व एवं कृतित्व है महान : उपमुख्यमंत्री अरूण साव

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समाज सेवा के लिए अहिल्याबाई पूर्णतः थीं समर्पित : लखन लाल देवांगन

अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी जयंती समारोह में शामिल हुए मंत्रीद्वय

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कोरबा/ भारत देश के इतिहास अत्यंत गौरवशाली एवं वैभवशाली रहा है। यह गौरवशाली एवं वैभवशाली इतिहास इस देश के नागरिकों के पुरूषार्थ से बना है, न कि किसी सरकार या संस्था से। भारत माता की इस पुण्य भूमि में कितने ही संत महात्मा, सपूतों को जन्म दिया है, जिन्होंने विश्व कल्याण के लिए कार्य किया है। ऐसे ही लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर हैं जिन्होंने एक बेटी, एक बहू , एक मां, एक सैनिक और एक शासक के रूप में श्रेष्ठ कार्य किया है। ऐसा कोई क्षेत्र अछूता नहीं रहा जिस क्षेत्र में देवी अहिल्याबाई होल्कर ने काम न किया हो। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व महान है। उक्त बातें छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री सह लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, विधि और विधायी कार्य, नगरीय प्रशासन विभाग एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरूण साव ने अग्रसेन कन्या महाविद्यालय में आयोजित पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
मंत्री श्री अरूण साव ने कहा कि महिला होकर उन्होंने लंबे समय तक अच्छे प्रशासक के रूप में कार्य करके महिला सशक्तिकरण का विश्व को संदेश दिया। लोकमाता जितनी सुसंस्कारित एक बहू और बेटी थी उतनी ही सशक्त प्रशासक भी थी। देवी अहिल्याबाई के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों के कारण मालवा क्षेत्र आज भी सांस्कृतिक रूप से संपन्न है। कार्यक्रम में उद्योग, व्यापार, वाणिज्य एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में दिए गए अप्रतिम योगदान के विषय में बताया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई की पहचान एक विनम्र एवं उदार शासक के रूप में थी। उनके हृदय में निर्धन एवं असहाय व्यक्तियों के लिए दया और परोपकार की भावना व्याप्त थी। उन्होंने समाज सेवा के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। वह अपनी प्रजा और गरीबों की भलाई के बारे में सोचती थी और निर्धनों के लिए हमेशा सहायता के लिए तत्पर रहती थीं। कार्यक्रम में गणमान्य नागरिक सहित महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित थी।