त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 : मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़, हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर किया मतदान

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 : मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़, हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर किया मतदान

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महासमुंद / त्रिस्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2025 के द्वितीय चरण में आज जनपद पंचायत पिथौरा और बागबाहरा के ग्रामीण मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। मतदान को लेकर न केवल युवा वर्ग बल्कि बुजुर्ग, दिव्यांगजन और महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुबह होते ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें लग गईं। लोकतंत्र के इस महापर्व में ग्रामीण अंचल के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इसी क्रम में आज बागबाहरा विकासखंड के ग्राम अरंड के मतदान केन्द्र में 75 वर्षीय लीलाबाई साहू ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने उत्साह के साथ मतदान करते हुए कहा कि मतदान हमारा अधिकार है, सबको अपना स्थानीय जनप्रतिनिधि चुनने मतदान अवश्य करना चाहिए। इसी प्रकार ग्राम मोहंदी की 88 वर्षीय बैशाखीन कमार, अरंड के 64 वर्षीय श्री राम जी सहिष ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए लोकतंत्र के प्रति आस्था का प्रदर्शन किया। इसी प्रकार ग्राम पंचायत मामा भांचा के सोहन पटेल ने अपनी शादी की व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर मतदान करने मतदान केंद्र पर पहुंचकर वोट डाला। पारंपरिक शादी के परिधान में पहुंचे सोहन को देखकर अन्य मतदाता भी प्रेरित हुए। उनका यह कार्य संदेश देता है कि मतदान केवल एक अधिकार ही नहीं बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी भी है।
त्रिस्तरीय पंचायत में फर्स्ट टाइम वोटर्स भी उत्साहित दिखे बागबाहरा विकासखण्ड के ग्राम मोहंदी की कु. रमा यादव, रीना यादव, उमा यादव, साक्षी वैष्णव, ग्राम अरंड के राहुल चंद्राकर एवं पिथौरा के ग्राम सपोस के दिनेश धृतलहरे ने पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने वोटिंग के बाद अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मतदाता जागरूकता कार्यक्रम से प्रभावित होकर लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लिया। उन्होंने बताया कि आगामी चुनावों में भी हम अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करेंगे।
ग्राम पंचायत मोहंदी की महिला मतदाताओं ने बढ़ चढ़ कर लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे यह साफ जाहिर हुआ कि वे अपने मताधिकार को लेकर जागरूक हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और अन्य सुविधाएं चाक-चौबंद रहीं, जिससे मतदाताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। ग्रामीण अंचल में इस उत्साह ने लोकतंत्र की मजबूती को और अधिक सशक्त किया।