कबीरधाम में चुनावी धांधली! केसदा में लोकतंत्र पर हमला, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन।

कबीरधाम में चुनावी धांधली! केसदा में लोकतंत्र पर हमला, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

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कवर्धा, कबीरधाम: कबीरधाम जिले की कवर्धा तहसील के ग्राम केसदा में चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कम से कम 13 मतगणना केंद्रों में सुनियोजित गड़बड़ी की गई है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर गहरा संदेह पैदा हो गया है। इस धांधली का सबसे बड़ा शिकार बैगा जनजाति के प्रत्याशी कामू बैगा हुए हैं, जिन्हें हराने की साजिश स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

मतगणना केंद्रों में गड़बड़ी के आरोप

ग्राम केसदा में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कांग्रेस ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, मतगणना के दौरान कई स्थानों पर ईवीएम में गड़बड़ी की गई और कुछ जगहों पर गिनती में अनियमितताएं देखी गईं।

स्थानीय निवासियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अनुसार, 13 मतगणना केंद्रों में जानबूझकर कुछ वोटों को अमान्य घोषित किया गया, जबकि कई जगहों पर मतगणना के दौरान पारदर्शिता नहीं रखी गई। कुछ स्थानों पर तो बैलेट पेपर में हेरफेर के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कलेक्ट्रेट के सामने धरना

गड़बड़ी के आरोपों के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक प्रशासन निष्पक्ष जांच की घोषणा नहीं करता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

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कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा, “हम लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे। प्रशासन की मिलीभगत से बैगा जनजाति के प्रत्याशी को हराने का प्रयास किया गया है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और जनता की आवाज़ उठाने के लिए संघर्ष करेंगे।”

कामू बैगा के समर्थन में ग्रामीणों का विरोध

ग्राम केसदा में बैगा समुदाय के लोगों ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि यह केवल चुनावी धांधली नहीं बल्कि बैगा जनजाति के खिलाफ अन्याय है। समुदाय के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।

प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता

इस पूरे मामले पर प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी फुटेज की जांच और चुनाव आयोग द्वारा उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा

चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह केवल एक प्रत्याशी की हार-जीत का मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र की साख का प्रश्न है। कांग्रेस और स्थानीय जनता का कहना है कि जब तक दोषियों को सज़ा नहीं मिलती और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

ग्राम केसदा की यह घटना बताती है कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर जनता कितनी सतर्क हो गई है। यदि निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं, तो उनकी पवित्रता को बनाए रखना प्रशासन और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या जनता को न्याय मिल पाता है या नहीं।