जिला स्तरीय संयुक्त मॉक अभ्यास: आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर कलेक्टर व एसपी ने ली बैठक

जिला स्तरीय संयुक्त मॉक अभ्यास: आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर कलेक्टर व एसपी ने ली बैठक

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जांजगीर-चांपा, 4 मार्च 2025:आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए 5 मार्च को अटल बिहारी वाजपेयी छत्तीसगढ़ राज्य ताप विद्युत उत्पादन इकाई मड़वा में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) एवं राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) का जिला स्तरीय संयुक्त मॉक अभ्यास आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास सुबह 9 बजे से शुरू होगा, जिसमें आपातकालीन स्थितियों से निपटने की विभिन्न प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा।

इस अभ्यास के सफल संचालन के लिए कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में बैठक आयोजित की। बैठक में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में मॉक अभ्यास के दौरान किए जाने वाले बचाव और राहत कार्यों, आपातकालीन व्यवस्थाओं तथा सुरक्षा उपायों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में एनडीआरएफ के अधिकारी नवीन कुमार, अपर कलेक्टर उज्ज्वल पोरवाल, अपर कलेक्टर आर.के. तंबोली, जिला सेनानी योगिता साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

आपदा प्रबंधन के तहत मॉक अभ्यास का उद्देश्य
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखना और उनमें सुधार करना है। यह अभ्यास आपदा की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग, तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया की दक्षता बढ़ाने में सहायक होगा।

इस अभ्यास में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:

आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों की तत्परता:
किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और राहत कार्यों के संचालन की प्रक्रिया का मूल्यांकन किया जाएगा।
संभावित आपदाओं से बचाव:
औद्योगिक दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं (भूकंप, बाढ़, अग्निकांड, गैस रिसाव आदि) के समय किए जाने वाले बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास किया जाएगा।
समन्वय और संवाद प्रणाली का परीक्षण:
विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच सूचना आदान-प्रदान एवं आपातकालीन संचार प्रणाली की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जाएगा।
मॉक ड्रिल के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन:
फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस सेवा, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के समन्वय से आपदा प्रबंधन की कार्ययोजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
मॉक अभ्यास के तहत की जाने वाली प्रमुख गतिविधियां
मॉक अभ्यास के तहत विभिन्न परिदृश्यों का निर्माण कर असली आपदा की तरह परिस्थितियां निर्मित की जाएंगी, जिनमें से कुछ प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं:

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औद्योगिक क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य।
गैस रिसाव जैसी आपातकालीन स्थिति में सुरक्षात्मक उपाय।
घायलों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई।
आपदा प्रबंधन टीमों के बीच समन्वय एवं सूचना का आदान-प्रदान।
क्षेत्रीय अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
आपदा प्रबंधन में जनसहभागिता और जागरूकता की भूमिका
आपदा प्रबंधन में केवल सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों, औद्योगिक कर्मचारियों एवं समुदायों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मॉक ड्रिल के दौरान आम नागरिकों को भी आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों, प्राथमिक उपचार और बचाव कार्यों की जानकारी दी जाएगी।

कलेक्टर आकाश छिकारा ने कहा कि “आपदा प्रबंधन के लिए समय-समय पर इस तरह के अभ्यास किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित एजेंसियों की तत्परता सुनिश्चित की जा सके।”

पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला ने कहा कि “आपदा प्रबंधन में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मॉक ड्रिल के दौरान हमारी टीम आपातकालीन स्थितियों में जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ तालमेल स्थापित करने का अभ्यास करेगी।”

बैठक के दौरान अधिकारियों को मॉक अभ्यास की रूपरेखा, समय-सारणी एवं विभिन्न एजेंसियों की भूमिकाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर सकें।

इस अभ्यास के माध्यम से आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को प्रभावी रणनीति बनाने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इससे आपदा के समय संसाधनों का समुचित उपयोग करने में भी सहायता मिलेगी।

यह संयुक्त मॉक अभ्यास औद्योगिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जिले के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे न केवल प्रशासनिक तैयारियों का मूल्यांकन किया जाएगा, बल्कि वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी बढ़ेगी।