Advertisement

होली के रंग, काव्य की उमंग: तुलसी साहित्य समिति की सरस काव्यगोष्ठी में कवियों ने बिखेरे साहित्यिक रंग

होली के रंग, काव्य की उमंग: तुलसी साहित्य समिति की सरस काव्यगोष्ठी में कवियों ने बिखेरे साहित्यिक रंग

अंबिकापुर। तुलसी साहित्य समिति की ओर से होली के पावन अवसर पर केशरवानी भवन में एक भव्य और सरस काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस काव्य संध्या की अध्यक्षता पूर्व एडीआईएस ब्रह्माशंकर सिंह ने की, जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ व्याख्याता सच्चिदानंद पांडेय रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी एसपी जायसवाल और साहित्यकार केके त्रिपाठी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित कवि और साहित्यप्रेमी उपस्थित थे, जिन्होंने अपने मनमोहक काव्यपाठ से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मां वागेश्वरी की वंदना और पौराणिक संदर्भ

गोष्ठी की शुरुआत मां वागेश्वरी की पारंपरिक वंदना और पूजा-अर्चना के साथ हुई। इस अवसर पर तुलसीकृत रामचरितमानस और कविवर एसपी जायसवाल द्वारा रचित सरगुजिहा रामायण का संक्षिप्त पाठ भी किया गया, जिससे उपस्थित जनसमुदाय को आध्यात्मिक अनुभूति हुई। वरिष्ठ कवि प्रकाश कश्यप ने अपनी मनोहारी सरस्वती-वंदना से कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

वरिष्ठ साहित्यकार सच्चिदानंद पांडेय ने अपने उद्बोधन में होली की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व वसंत ऋतु में मनाया जाता है और अपने साथ आनंद, उल्लास और प्रेम का संदेश लाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें आज की युवा पीढ़ी को होली के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना चाहिए ताकि यह प्राचीन परंपरा आगे भी पुष्पित-पल्लवित होती रहे।

पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ब्रह्माशंकर सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि त्योहार हमारे पूर्वजों की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं, जो समाज में प्रेम, समरसता और एकता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द्र और आत्मीयता का भी पर्व है।

काव्य की रंगीन छटा

गोष्ठी में कई प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से होली के विभिन्न रंगों को शब्दों में पिरोया। कवयित्री अर्चना पाठक ने अपनी कविता में होली के रंगों के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि ये रंग मानव जीवन में सभी भेदों को मिटाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा:

“गुलाल की महक हवा में घुलती है, चारों ओर रंग बिखरते हैं,
तब दिलों की दूरियां मिट जाती हैं, और रिश्तों में नई मिठास घुल जाती है।”

वरिष्ठ कवि एसपी जायसवाल ने होली के पौराणिक संदर्भों को अपने काव्यपाठ में समेटते हुए बताया कि हिरण्यकशिपु के अत्याचारों से भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका दहन की परंपरा का धार्मिक महत्व है। इसके साथ ही उन्होंने कृष्ण-लीला से जुड़ी होली की परंपराओं का भी उल्लेख किया। उनकी एक कविता ने सभी को भावविभोर कर दिया:

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

“नैन उनींदी, बोझिल पलकें, लेती जमुहाई,
वह मृगनयनी होली में आई।”

कवयित्री शिरीन खान ने अपनी कविता में प्रेम और सौहार्द्र के रंगों को अभिव्यक्त किया:

“रंग बोलते हैं प्यार की भाषा, मनुहार की भाषा,
इकरार की भाषा, इंतजार की भाषा।”

माधुरी जायसवाल ने होली को आशाओं का पर्व बताते हुए कहा:

“आशाओं के इस पर्व पर सपनों को सजाएं,
सपनों को पूरा करने से पहले आओ पंख फैलाएं।”

कवयित्री आशा पांडेय ने अपने दोहे के माध्यम से प्रेम के रंग में रंग जाने की कामना की:

“एक रंग से रंग दो मन को मेरे यार,
याद रहे सबको सदा, तेरा-मेरा प्यार।”

युवा कवि निर्मल गुप्ता ने होली के रंगों को खुशियों का संदेशवाहक बताया:

“ये होली के रंग सिर्फ़ रंग नहीं हैं,
ये हैं खुशी का पैगा़म, जो लाते हैं चेहरे पर मुस्कान।”

ब्रज और अवध की होली का सजीव चित्रण

कई कवियों ने ब्रज और अवध की होली का मनोहारी चित्रण अपनी कविताओं में किया। कवयित्री पूनम पांडेय ने कन्हैया की शोभा को इन शब्दों में उकेरा:

“ब्रज में मचने लगा है शोर, होली खेले नंदकिशोर,
माथे मोर-मुकुट है साजे, पैरों में पैंजनी भी बाजे।”

वरिष्ठ कवि रामलाल विश्वकर्मा ने राधा-कृष्ण की होली को जीवंत करते हुए कहा:

“मत मारो पिचकारी राधारानी मनुहार करे,
जब मारे कान्हा पिचकारी, पुलकित मन से स्वीकार करे।”

आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने बरसाने की होली का चित्रण करते हुए लिखा:

“गालों में गुलाल लगाए, भर रंग मारे पिचकारी रे,
गावत फाग नाचत निकली, बरसाने की टोली रे।”

मुकुंदलाल साहू ने अपने दोहे के माध्यम से होली के सामाजिक संदेश को प्रस्तुत किया:

“होली रंग-अबीर का है पावन त्योहार,
मिटे द्वेष-दुर्भावना, बढ़े जगत में प्यार।”

कवयित्री अर्चना पाठक ने अयोध्या की होली को इन शब्दों में चित्रित किया:

“होली के रंग में रंगे हैं सीता संग रघुराई,
खेल रहे अवध में देखो सतरंगी होली आई।”

समापन और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रकाश कश्यप ने अपनी कविता के माध्यम से सभी से होली की मस्ती में सम्मिलित होने का आह्वान किया:

“होली का मौसम, है फाग का तराना,
छींटे अगर लगे तो है अर्ज भूल जाना।”

डॉ. उमेश पांडेय की कविता “होली के रंग में साथ ये तेरे संग है” ने भी श्रोताओं का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का संचालन कवि प्रकाश कश्यप और कवयित्री आशा पांडेय ने किया। वरिष्ठ गीतकार पूनम दुबे ‘वीणा’ ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस आयोजन में दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव, शुभम पांडेय, प्रमोद सहित कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

यह काव्यगोष्ठी न केवल होली के रंगों में सराबोर थी, बल्कि इसमें साहित्यिक और सांस्कृतिक समृद्धि भी दिखाई दी। यह आयोजन सद्भाव, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने में सफल रहा।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47