
प्रयागराज IIIT छात्र की आत्महत्या: परीक्षा में फेल होने से आया अवसाद में, चौथी मंजिल से कूदकर दी जान – जांच जारी
प्रयागराज के IIIT संस्थान में तीसरे वर्ष के छात्र ने आत्महत्या कर ली। डिप्रेशन का कारण परीक्षा में असफलता बताया जा रहा है। पुलिस जांच में जुटी, कॉलेज ने मानसिक स्वास्थ्य सहायता शुरू की।
प्रयागराज: IIIT छात्र की आत्महत्या से हड़कंप, परीक्षा में असफलता से था अवसाद में – जांच में जुटी पुलिस, कॉलेज प्रशासन सतर्क
प्रयागराज, 08 अप्रैल 2025। प्रयागराज स्थित प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) में एक छात्र द्वारा आत्महत्या की घटना ने पूरे शैक्षणिक वातावरण को झकझोर दिया है। बताया गया है कि छात्र ने परीक्षा में असफलता के कारण मानसिक अवसाद में आकर हॉस्टल की चौथी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।
मृतक छात्र की पहचान अभिषेक शर्मा (काल्पनिक नाम) के रूप में हुई है, जो संस्थान के तीसरे वर्ष का छात्र था और कंप्यूटर साइंस संकाय में अध्ययनरत था।
रविवार देर रात लगभग 11:30 बजे यह घटना घटी जब अभिषेक अचानक हॉस्टल के ऊपरी तल से कूद गया। उसके दोस्तों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से वह चुपचाप और चिंतित नजर आ रहा था। परिजनों को जैसे ही सूचना मिली, वे आज सुबह प्रयागराज पहुंचे।
छात्र को गंभीर अवस्था में SRN हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच जारी:
सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने आत्महत्या की पुष्टि करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। हॉस्टल के छात्रों और प्राध्यापकों से पूछताछ की जा रही है।
डायरी और डिजिटल सबूत जब्त:
छात्र का मोबाइल फोन, लैपटॉप और हॉस्टल रूम से एक डायरी बरामद की गई है। इसमें तनाव और असफलता को लेकर कुछ संकेत मिले हैं, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार:
शव का पोस्टमार्टम आज सुबह किया गया, जिसकी रिपोर्ट में मौत का कारण “बहुत ऊंचाई से गिरना” बताया गया है। शरीर पर किसी प्रकार के संघर्ष के निशान नहीं मिले।
कॉलेज प्रशासन ने की पुष्टि:
IIIT प्रशासन ने छात्र की मृत्यु की पुष्टि करते हुए पूरे संस्थान में शोक व्यक्त किया है। मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए विशेष परामर्श सत्र शुरू करने की घोषणा की गई है।
मनोवैज्ञानिक सहायता सुविधा सक्रिय:
कॉलेज ने सभी छात्रों के लिए 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और ऑन-कैंपस काउंसलिंग की सुविधा बहाल की है।
मनोचिकित्सक बोले:
“आज के प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल में छात्रों पर भावनात्मक दबाव काफी बढ़ गया है। संस्थानों को नियमित मानसिक स्वास्थ्य सत्र आयोजित करने चाहिए।”
– डॉ. स्नेहा वर्मा, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट











