Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: सामूहिक धर्मांतरण पर उम्रकैद और ₹25 लाख जुर्माना, जानें नया कानून






Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026: सामूहिक धर्मांतरण पर उम्रकैद और ₹25 लाख जुर्माना

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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026: अब धर्मांतरण कराना पड़ेगा भारी, ‘Mass Conversion’ पर उम्रकैद और ₹25 लाख जुर्माने का प्रावधान

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर भी सरकार की पैनी नजर, जानिए नए कानून की हर छोटी-बड़ी बात।

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फाइल फोटो: छत्तीसगढ़ विधानसभा में ऐतिहासिक विधेयक पारित। (सांकेतिक चित्र)

रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने राज्य में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। 19 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ (Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026) को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। यह नया कानून 1968 के पुराने अधिनियम की जगह लेगा और इसमें सजा के प्रावधान इतने सख्त रखे गए हैं कि यह देश के सबसे कड़े धर्मांतरण विरोधी कानूनों में से एक बन गया है।

बड़ी खबर: इस कानून के तहत ‘सामूहिक धर्मांतरण’ (Mass Conversion) के दोषियों को कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। साथ ही ₹25 लाख तक का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं (Key Features)

गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में ‘धर्मांतरण’ की परिभाषा को और व्यापक बनाया गया है। अब केवल शारीरिक बल ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों से किए गए प्रलोभन को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

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  • डिजिटल दायरे में विस्तार: सोशल मीडिया, वेबसाइट्स या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक संचार के जरिए अगर किसी को धर्म बदलने के लिए उकसाया जाता है या गुमराह किया जाता है, तो वह इस कानून के तहत अपराधी माना जाएगा।
  • प्रलोभन (Allurement) की नई परिभाषा: इसमें मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवनशैली का वादा, चिकित्सा सुविधा, रोजगार या शादी का लालच देना भी शामिल है।
  • पूर्व सूचना अनिवार्य: अब धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति और धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति (पुजारी/पादरी/मौलवी) दोनों को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को सूचना देनी होगी।

सजा और जुर्माने का पूरा विवरण (Punishment Details)

नए कानून में अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

अपराध की श्रेणी न्यूनतम सजा अधिकतम सजा जुर्माना (न्यूनतम)
सामान्य अवैध धर्मांतरण 7 वर्ष 10 वर्ष ₹5 लाख
नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC का धर्मांतरण 10 वर्ष 20 वर्ष ₹10 लाख
सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) 10 वर्ष आजीवन कारावास ₹25 लाख

नोट: ‘सामूहिक धर्मांतरण’ का अर्थ है एक ही समय में दो या दो से अधिक व्यक्तियों का अवैध रूप से धर्म परिवर्तन करना।

‘घर वापसी’ पर कोई पाबंदी नहीं

विधेयक में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म (Ancestral Religion) में वापस लौटता है, तो उसे ‘धर्मांतरण’ नहीं माना जाएगा। इसे ‘घर वापसी’ के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, केवल विवाह के उद्देश्य से किए गए धर्मांतरण को भी अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।

पीड़ितों के लिए मुआवजे का प्रावधान

यह कानून न केवल दोषियों को सजा देता है, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास पर भी ध्यान देता है। कोर्ट दोषी व्यक्ति से पीड़ित को ₹10 लाख तक का मुआवजा दिलाने का आदेश दे सकता है। यह राशि जुर्माने के अतिरिक्त हो सकती है।

विपक्ष का रुख और विवाद

विधेयक पारित होने के दौरान विधानसभा में काफी हंगामा भी देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इसे ‘असंवैधानिक’ बताते हुए सदन से वॉकआउट किया। विरोध करने वालों का तर्क है कि यह कानून नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह कानून राज्य की संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है।

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