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“बिलासपुर में कांग्रेस की विशाल रैली: ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान से चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव”

‘‘वोट चोर, गद्दी छोड़’’ अभियान के तहत बिलासपुर में कांग्रेस की विशाल रैली, चुनाव आयोग पर उठे गंभीर सवाल

रायपुर, 08 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ की राजनीति इस समय गर्म है। कांग्रेस ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” अभियान के तहत 9 सितंबर को बिलासपुर के मुंगेली नाका में प्रदेश स्तरीय विशाल रैली और आमसभा का आयोजन किया है। इस रैली को लेकर कांग्रेस ने दावा किया है कि यह राज्य की अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक सभा होगी।

रैली में कांग्रेस के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के तमाम बड़े नेता शामिल होंगे। प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, प्रभारी सचिव एस. सम्पत, जरिता लैतफलांग और विजय जांगिड़ मंच साझा करेंगे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस रैली के माध्यम से जनता को यह संदेश दिया जाएगा कि देश की चुनावी प्रणाली पर मंडरा रहा संदेह अब गहरा संकट बन चुका है।

राहुल गांधी के साक्ष्य बने राजनीतिक बहस का केंद्र

कांग्रेस की इस रैली की पृष्ठभूमि में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का वह खुलासा है, जिसमें उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों के ठोस साक्ष्य संसद में प्रस्तुत किए।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा में एक ही मतदाता का नाम अलग-अलग जगहों पर बार-बार दर्ज है। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र में एक प्रधानमंत्री आवास में 80 वोटरों का नाम दर्ज पाया गया, तो वहीं एक बियर क्लब के पते पर 68 मतदाता सूचीबद्ध मिले।

राहुल गांधी ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई स्थानों पर एक व्यक्ति अलग-अलग नाम से कई बार वोट डाल रहा है। यह केवल गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित वोट चोरी है। उनका कहना है कि यदि ऐसी विसंगतियां चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनी रहीं तो लोकतंत्र की जड़ें हिल जाएंगी।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि आयोग डिजिटल वोटर लिस्ट राजनीतिक दलों को उपलब्ध नहीं करा रहा है। साथ ही, सीसीटीवी फुटेज की उपलब्धता संबंधी नियमों में भी बदलाव कर दिए गए हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह बढ़ता है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कहना है कि चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष नहीं रह गई है और उसका आचरण “एक रहस्य” बन गया है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी दोहराया कि जनता को चुनाव प्रक्रिया की पूरी जानकारी पाने का अधिकार है और चुनाव से जुड़े किसी भी रिकॉर्ड को मिटाना कानूनन अपराध है।

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महाराष्ट्र चुनाव से गहराया अविश्वास

कांग्रेस ने विशेष रूप से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को संदर्भित किया है। पार्टी का कहना है कि वहां पांच साल की तुलना में केवल पांच महीने में मतदाताओं की संख्या में असामान्य वृद्धि हुई। स्थिति यह रही कि मतदाताओं की संख्या राज्य की वयस्क आबादी से भी अधिक हो गई।

साथ ही, वहां शाम पांच बजे के बाद अचानक मतदान प्रतिशत में जबर्दस्त उछाल देखा गया। कांग्रेस का दावा है कि यह “वोट चोरी” का सबसे बड़ा उदाहरण है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का आक्रामक तेवर

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पहले से ही भाजपा सरकार को घेरने में जुटी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर है। मंत्री केदार कश्यप पर लगे मारपीट और गाली-गलौज के आरोपों के बाद से विपक्ष को और बल मिला है।

ऐसे समय में यह रैली कांग्रेस के लिए एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकती है। प्रदेश कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस अभियान से जनता को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि भाजपा ने केवल सत्ता पाने के लिए चुनावी धांधली का सहारा लिया है।

जनता की नजरें रैली पर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 9 सितंबर की यह रैली आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ-साथ आम जनता तक यह संदेश देना चाहती है कि यदि लोकतंत्र को बचाना है तो चुनावी धांधली के खिलाफ खड़ा होना होगा।

बिलासपुर और आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की संभावना है। सोशल मीडिया पर भी #VoteChorGaddiChhod अभियान तेजी से ट्रेंड कर रहा है।

कांग्रेस संचार विभाग का बयान

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा—

“यह केवल कांग्रेस की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र को बचाने की जंग है। राहुल गांधी ने जो तथ्य प्रस्तुत किए हैं, वे किसी भी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं। चुनाव आयोग को इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

कांग्रेस की बिलासपुर रैली सिर्फ एक आमसभा नहीं, बल्कि देश की चुनावी प्रणाली पर उठ रहे संदेहों का राजनीतिक मंच है। राहुल गांधी के साक्ष्य और कांग्रेस के आरोपों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में किस तरह से राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बनता है।

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