यूएई के आसमान में F-16 लड़ाकू विमानों का पहरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान को मिला अभूतपूर्व सुरक्षा सम्मान, गहरे रणनीतिक संबंधों की गवाही
अबू धाबी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जब अपनी पांच देशों की महत्वपूर्ण राजनयिक यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की धरती पर कदम रखने जा रहे थे, तब आसमान में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दुनिया के सामने प्रदर्शित कर दिया। जैसे ही प्रधानमंत्री का विशेष विमान ‘एयर इंडिया वन’ यूएई के हवाई क्षेत्र (Airspace) में प्रविष्ट हुआ, यूएई वायुसेना के अत्याधुनिक F-16 लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को चारों तरफ से घेरकर सुरक्षा प्रदान की।
यूएई सरकार द्वारा दिया गया यह विशेष एस्कॉर्ट सम्मान बेहद दुर्लभ माना जाता है और यह केवल उन्हीं चुनिंदा वैश्विक नेताओं को दिया जाता है जिनके साथ यूएई के संबंध अत्यंत घनिष्ठ और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। F-16 ‘डेजर्ट फाल्कन’ लड़ाकू विमानों द्वारा प्रधानमंत्री के विमान को अबू धाबी में सुरक्षित लैंडिंग कराने तक एस्कॉर्ट किया गया, जिसे दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती, आपसी भरोसे और व्यक्तिगत गर्मजोशी के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
गहरे रणनीतिक संबंधों और व्यक्तिगत गर्मजोशी का प्रतिबिंब
भारतीय जनता पार्टी और कूटनीतिक विश्लेषकों ने इस घटना के वीडियो फुटेज साझा करते हुए इसे नई दिल्ली और अबू धाबी के बीच मजबूत होते व्यापक रणनीतिक संबंधों का प्रमाण बताया है [cite: 2.2.3]। पश्चिम एशिया की वर्तमान और तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच, यूएई द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री का इस तरह का भव्य और अभूतपूर्व सैन्य सम्मान के साथ स्वागत करना बेहद मायने रखता है।
अबू धाबी के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत खुद यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने किया [cite: 2.2.5]। इसके बाद प्रधानमंत्री को औपचारिक तौर पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने प्रधानमंत्री मोदी को अमीरात के नेतृत्व और वहां की जनता के लिए एक “सच्चा खजाना” बताया और कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार हैं [cite: 2.1.3]।
पीएम मोदी के यूएई दौरे के मुख्य रणनीतिक उद्देश्य:
- ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान: पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दौरे पर भारत और यूएई के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
- व्यापार और निवेश में बढ़ोतरी: दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के बाद व्यापारिक रिश्तों को नया आयाम मिला है [cite: 2.1.2]। इस बैठक में बुनियादी ढांचे और निवेश की नई परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी [cite: 2.1.2]।
- रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा: F-16 एस्कॉर्ट के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा निर्माण और सुरक्षा सहयोग को लेकर भी उच्च स्तरीय चर्चाएं तय की गई हैं।
5 देशों की महायात्रा का पहला पड़ाव
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा 15 मई से 20 मई 2026 तक चलने वाली पांच राष्ट्रों की व्यापक कूटनीतिक यात्रा का पहला हिस्सा है। यूएई में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नीदरलैंड के लिए रवाना होंगे, जहां वे सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे अत्याधुनिक विषयों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद वे स्वीडन, नॉर्वे (जहां वे तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे) और अंत में इटली की यात्रा करेंगे।
आसमान से लेकर जमीन तक जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूएई में भव्य स्वागत हुआ है, उसने स्पष्ट कर दिया है कि आज वैश्विक कूटनीति के केंद्र में भारत एक अनिवार्य शक्ति बनकर उभर चुका है। यह यात्रा आने वाले दिनों में भारत और खाड़ी देशों के आर्थिक तथा रणनीतिक एकीकरण को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।










