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भूपेश बघेल का बयान: मनमोहन सिंह ने मंदी से निकाला था, आज हम खुद के संकट में फंसे | Bhupesh Baghel News





पूर्व सीएम भूपेश बघेल का बड़ा बयान: ‘वैश्विक मंदी और मौजूदा आर्थिक संकट में है बड़ा अंतर’


सियासी गलियारे से

भूपेश बघेल का केंद्र पर निशाना: ‘हम खुद के बनाए संकट में फंसे हैं, मनमोहन सिंह ने देश को मंदी से निकाला था’

विशेष रिपोर्ट: प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क | रायपुर | 15 मई 2026

रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश की वर्तमान आर्थिक स्थितियों की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल से करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि आज देश जिस आर्थिक परिस्थिति से गुजर रहा है, वह किसी वैश्विक मंदी का परिणाम नहीं बल्कि ‘स्व-निर्मित संकट’ है।

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“मनमोहन सिंह और चिदंबरम ने भी देश से अपील की थी, लेकिन तब की और अब की परिस्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर है। आज हम खुद के बनाए संकट में फंसे हैं, जबकि तब मनमोहन सिंह ने वैश्विक मंदी के बीच मनरेगा जैसी योजनाओं से लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाकर देश को मंदी से बाहर निकाला था।” – भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री

मनरेगा और क्रय शक्ति पर दिया जोर

पूर्व मुख्यमंत्री ने डॉ. मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि 2008 की वैश्विक मंदी के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने दूरदर्शी फैसले लिए थे। उन्होंने विशेष रूप से मनरेगा (MGNREGA) का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे इस योजना ने ग्रामीण भारत के हाथों में पैसा पहुंचाया। बघेल के अनुसार, जब लोगों की जेब में पैसा आया, तो उनकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ी, जिससे बाजार में मांग पैदा हुई और भारत वैश्विक मंदी के प्रभाव से सुरक्षित बाहर निकल सका।

बघेल के बयान के 3 मुख्य बिंदु:

  • स्व-निर्मित संकट: बघेल का आरोप है कि वर्तमान आर्थिक चुनौतियां बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि नीतिगत विफलताओं की वजह से हैं।
  • ऐतिहासिक तुलना: उन्होंने 2008 की वैश्विक मंदी को याद दिलाते हुए तत्कालीन नेतृत्व की सराहना की।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था: उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को आर्थिक संकट से उबारने का रास्ता ग्रामीण जनता की आय बढ़ाने से होकर गुजरता है।

‘अपील’ और ‘क्रियान्वयन’ में अंतर

भूपेश बघेल ने अपने बयान में संकेत दिया कि केवल जनता से अपील करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि मनमोहन सिंह के समय की अपीलों के पीछे ठोस योजनाएं और वित्तीय प्रबंधन था। बघेल ने वर्तमान सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में आम आदमी की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है, जिससे बाजार की गति धीमी पड़ गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बघेल का यह बयान आगामी चुनावों और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक बहस को तेज करने के उद्देश्य से दिया गया है। छत्तीसगढ़ में भी धान खरीदी और ग्रामीण विकास की योजनाओं को लेकर बघेल हमेशा ‘क्रय शक्ति’ बढ़ाने का तर्क देते रहे हैं, जिसे उन्होंने अब राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में दोहराया है।


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