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PM Modi UAE Visit: यूएई ने भारत के लिए किया $5 बिलियन के महा-निवेश का एलान, रक्षा और टेक्नोलॉजी पर बने नए समीकरण






भारत-यूएई संबंधों में नया अध्याय: पीएम मोदी की यूएई यात्रा, 5 अरब डॉलर का निवेश और रक्षा-ऊर्जा पर ऐतिहासिक समझौते | Pradesh Khabar


भारत-यूएई संबंधों में नया स्वर्णिम अध्याय: प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से मजबूत हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी, यूएई ने किया 5 अरब डॉलर के महा-निवेश का एलान

नई दिल्ली / अबू धाबी: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ता अब एक बेहद मजबूत आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी में तब्दील हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूएई यात्रा ने दोनों देशों के कूटनीतिक इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। अबू धाबी हवाई अड्डे पर यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान द्वारा प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री मोदी का जिस गर्मजोशी से स्वागत किया गया, वह दोनों नेताओं के बीच के गहरे व्यक्तिगत संबंधों और दोनों देशों के बीच की अटूट दोस्ती को बयां करता है। इस बेहद महत्वपूर्ण दौरे में भारत के विकास कार्यों के लिए यूएई की ओर से 5 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 41,000 करोड़ रुपये से अधिक) के बड़े निवेश की घोषणा की गई है, जो दोनों देशों के व्यापारिक और आर्थिक रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।


अबू धाबी में गर्मजोशी से स्वागत: ‘भाई’ के विशेष जेस्चर पर पीएम मोदी ने जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर अपनी इस यात्रा के अनुभवों और महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठकों की जानकारी साझा की। प्रधानमंत्री ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को अपना ‘भाई’ बताते हुए इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रपति खुद उन्हें लेने अबू धाबी एयरपोर्ट पहुंचे थे।

“अबू धाबी हवाई अड्डे पर मेरा स्वागत करने के विशेष जेस्चर के लिए मैं अपने भाई महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, यूएई के राष्ट्रपति को धन्यवाद देता हूं। मैं ऊर्जा, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भारत-यूएई संबंधों को आगे बढ़ाने पर हमारी चर्चाओं के प्रति आशान्वित हूं।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि भारत और यूएई की दोस्ती सिर्फ दो सरकारों के बीच की नहीं है, बल्कि यह दो देशों के लोगों के दिलों का जुड़ाव है। उन्होंने वैश्विक कल्याण और पृथ्वी के बेहतर भविष्य के लिए दोनों देशों के मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और यूएई की दोस्ती बेहद मजबूत है और दोनों राष्ट्र मिलकर एक सतत और समृद्ध भविष्य के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

द्विपक्षीय वार्ता के मुख्य बिंदु: व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर गहन चर्चा

इस आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों वैश्विक नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की और आमने-सामने की विस्तृत बैठकें हुईं। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) और व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को और अधिक प्रभावी बनाना था। वार्ताओं में मुख्य रूप से पारंपरिक व्यापार के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों, वैश्विक सप्लाई चेन की सुरक्षा और रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार:

  • व्यापार और आर्थिक गतिविधियां: गैर-तेल व्यापार को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बाजारों में व्यापारियों के लिए सुगम रास्ते तलाशने पर सहमति बनी।
  • ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): भारत के लिए कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर बात हुई।
  • रक्षा और रणनीतिक तालमेल: दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास, रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और खुफिया जानकारी साझा करने की प्रणाली को मजबूत करने पर बल दिया गया।
  • शिपिंग और बुनियादी ढांचा: भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को गति देने और दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स तथा समुद्री परिवहन को आधुनिक बनाने पर विशेष चर्चा हुई।

ऐतिहासिक समझौते और उनके दूरगामी परिणाम

इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों का अंतिम रूप लेना रहा। यूएई द्वारा भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा आर्थिक मोर्चे पर गेम-चेंजर साबित होने वाली है। यह निवेश मुख्य रूप से भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में किया जाएगा।

क्र.सं. सहयोग का क्षेत्र समझौते और महत्वपूर्ण निर्णय भारत को होने वाला मुख्य लाभ
1 आर्थिक निवेश यूएई द्वारा भारत में 5 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 5 Billion) के निवेश का एलान। भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भारी वित्तीय मजबूती मिलेगी।
2 ऊर्जा और सप्लाई चेन ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और क्रिटिकल सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए समझौता। वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत को ऊर्जा और कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
3 रक्षा सहयोग सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकियों और सुरक्षा के मोर्चे पर संयुक्त सहयोग का विस्तार। क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और आतंकवाद के खिलाफ रक्षा ढांचा मजबूत होगा।
4 शिपिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर बंदरगाह विकास, नौवहन (Shipping) और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान पर सहमति। लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और भारतीय उत्पादों की पहुंच वैश्विक बाजारों में आसान होगी।

आतंकवाद और क्षेत्रीय चुनौतियों पर कड़ा रुख: यूएई पर हुए हमलों की निंदा

इस बैठक की एक और बड़ी कूटनीतिक विशेषता यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक शांति के मुद्दे पर भारत का रुख बेहद स्पष्टता के साथ रखा। प्रधानमंत्री ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में यूएई के नेतृत्व के साथ भारत की एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के नेतृत्व, साहस और बुद्धिमत्ता की सराहना की, जो संकट के इस दौर में स्पष्ट रूप से दिखाई दी है। भारत ने हमेशा इस बात का समर्थन किया है कि संप्रभुता का सम्मान और आतंकवाद का पूर्ण खात्मा ही वैश्विक स्थिरता की पहली शर्त है। इस मोर्चे पर दोनों देशों का एक सुर में बोलना मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण संकेत है।

प्रवासी भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण के लिए आभार

यूएई में रहने वाला भारतीय समुदाय (Diaspora) वहां की अर्थव्यवस्था और समाज के निर्माण में एक रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है। यूएई में लगभग 35 लाख से अधिक भारतीय निवास करते हैं, जो दोनों देशों के बीच एक जीवंत सांस्कृतिक सेतु हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी वार्ता के दौरान विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया और यूएई के राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने संकट और सामान्य, दोनों ही परिस्थितियों में भारतीय समुदाय की भलाई, सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट की। यूएई प्रशासन द्वारा भारतीयों को दिए जाने वाले सम्मान और अवसरों ने इस द्विपक्षीय रिश्ते को केवल कूटनीतिक न रखकर पारिवारिक बना दिया है।

वैश्विक मंच पर भारत-यूएई की साझेदारी का भविष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यूएई यात्रा केवल तात्कालिक समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले दशकों के लिए दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण का रोडमैप है। 5 अरब डॉलर का निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है, तो वहीं रक्षा, ऊर्जा और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में हुए समझौते यह दर्शाते हैं कि दोनों देश अब एक-दूसरे की रणनीतिक जरूरतों के पूरक बन चुके हैं।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के इस दौर में भारत और यूएई जैसी दो बड़ी आर्थिक ताकतों का इस तरह करीब आना और साझा विकास की राह पर आगे बढ़ना, न केवल इन दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक परिदृश्य के लिए एक सकारात्मक और दूरगामी संदेश है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और साझा वैश्विक प्रगति की भावना के साथ शुरू हुआ यह सफर आने वाले समय में वैश्विक समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगा।


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