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इथेनॉल मिश्रण पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला – उपभोक्ताओं को राहत देने कर संरचना सुधार की मांग

इथेनॉल मिश्रण पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला – उपभोक्ताओं को राहत देने कर संरचना सुधार की मांग

टी.एस. सिंहदेव ने केंद्र से मांगा कर संरचना सुधार, पेट्रोल ₹5 प्रति लीटर सस्ता करने का दिया सुझाव

पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को पत्र लिखकर ई-20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की कर संरचना में सुधार की मांग की। उनका कहना है कि सुधार होने पर पेट्रोल की कीमत ₹5 प्रति लीटर तक घट सकती है। साथ ही उन्होंने ई-20 ईंधन के दुष्प्रभावों और उपभोक्ताओं पर बढ़ते बोझ का भी जिक्र किया।

अंबिकापुर/रायपुर, 8 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी को एक विस्तृत शोधपरक पत्र लिखकर ई-20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की कर संरचना में सुधार की मांग की है। सिंहदेव ने कहा कि मौजूदा कर प्रणाली उपभोक्ताओं पर अनुचित बोझ डाल रही है और यदि इसमें सुधार किया जाए तो आम जनता को ₹5 प्रति लीटर तक की सीधी राहत मिल सकती है।

पेट्रोल-इथेनॉल मिश्रण पर “दोहरा कराधान”

अपने पत्र में सिंहदेव ने बताया कि शुद्ध इथेनॉल पर केवल 5% जीएसटी लगता है, लेकिन जैसे ही इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है, उस पर पेट्रोल पर लागू केंद्रीय उत्पाद कर, उपकर और राज्य वैट भी लगा दिए जाते हैं। इससे इथेनॉल मिश्रण का पूरा हिस्सा भी पेट्रोल की तरह टैक्स के दायरे में आ जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 20% इथेनॉल हिस्से को अतिरिक्त करों से मुक्त कर दिया जाए तो उपभोक्ताओं को तुरंत ₹5 प्रति लीटर सस्ती दर पर पेट्रोल उपलब्ध कराया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ का उदाहरण

सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए बताया कि इथेनॉल खरीद, प्रोसेसिंग और ब्लेंडिंग के बाद ई-20 ईंधन की वास्तविक लागत ₹94.95 प्रति लीटर आती है। इसके बावजूद, 5 सितंबर 2025 तक राज्य में पेट्रोल की खुदरा कीमतें ₹99.44 से ₹100.55 प्रति लीटर तक बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह अंतर केवल कर संरचना की विसंगतियों के कारण है।

उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा लाभ

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पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में सरकार ने इथेनॉल मिश्रण नीति से लगभग ₹43,000 करोड़ रुपए की बचत की है। इसके साथ ही रूस और अन्य देशों से सस्ते दाम पर तेल खरीदा गया, फिर भी आम उपभोक्ताओं को राहत नहीं दी गई।

ई-20 ईंधन से वाहन पर पड़ रहे दुष्प्रभाव

सिंहदेव ने अपने पत्र में ई-20 ईंधन के कारण वाहनों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों का भी उल्लेख किया—

2010 से पहले बने वाहनों की औसत माइलेज में 7% की गिरावट,

2010 से 2023 के बीच निर्मित वाहनों में 4% तक माइलेज की कमी,

इथेनॉल के हाइग्रोस्कोपिक और संक्षारक स्वभाव के कारण इंजन में टूट-फूट और रखरखाव की बढ़ती समस्या,

बीमा कंपनियों द्वारा इथेनॉल से होने वाली क्षति का जोखिम कवर करने से इंकार, जिससे उपभोक्ता दोहरी मार झेल रहे हैं।

एनर्जी सिक्योरिटी या क्रोनी कैपिटलिज्म?

सिंहदेव ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण की मूल भावना ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरणीय स्थिरता थी, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह नीति आम उपभोक्ताओं के लिए महंगा सौदा बन चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि यह नीति अब “हरित ऊर्जा” का मील का पत्थर बनने के बजाय क्रोनी कैपिटलिज्म और उपभोक्ताओं के साथ असंवेदनशील व्यवहार का उदाहरण बन रही है।

सिंहदेव की मांगें

पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं—

1. कर संरचना सुधारकर इथेनॉल हिस्से को केवल 5% जीएसटी के दायरे में लाया जाए।

2. इथेनॉल मिश्रण से होने वाले वित्तीय लाभ सीधे उपभोक्ताओं को दिए जाएं, न कि केवल सरकारी खजाने तक सीमित रहें।

3. बीमा और वारंटी संबंधी स्पष्ट नीतियां बनाई जाएं ताकि उपभोक्ताओं को अनुचित जोखिम न उठाना पड़े।

पूर्व उपमुख्यमंत्री सिंहदेव ने कहा कि यदि सरकार ने त्वरित कदम नहीं उठाए तो ई-20 ईंधन को हरित ऊर्जा के रूप में याद करने के बजाय यह उपभोक्ताओं पर थोपे गए मंहगे और गुणवत्ता हीन ईंधन के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने केंद्र से अपील की कि इस मामले को तत्काल संज्ञान में लेकर आवश्यक सुधार किए जाएं ताकि आम जनता को वास्तविक राहत मिल सके।

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