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शासकीय सेवकों की मृत्यु पर अनुग्रह राशि बढ़ाने की मांग तेज

छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवकों की मृत्यु पर अनुग्रह राशि बढ़ाने की मांग, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने सरकार को सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि शासकीय सेवक की सेवा के दौरान मृत्यु पर आश्रित परिवार को मिलने वाली अनुग्रह राशि ₹50,000 से बढ़ाकर मध्यप्रदेश की तरह ₹1,25,000 किया जाए। संघ ने इसे लागू करने ज्ञापन सौंपा।

शासकीय सेवकों की मृत्यु पर अनुग्रह राशि बढ़ाने की मांग तेज

छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने सरकार से किया पुनरीक्षण का आग्रह

दुर्ग, 10 सितम्बर 2025। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, जिला शाखा दुर्ग ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि शासकीय सेवक की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को मिलने वाली अनुग्रह राशि (अनुदान) का पुनरीक्षण किया जाए। संघ के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने इस संबंध में कलेक्टर दुर्ग के माध्यम से माननीय मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन रायपुर को ज्ञापन सौंपा है।

वर्तमान प्रावधान

फिलहाल छत्तीसगढ़ में प्रावधान है कि शासकीय सेवक की सेवा अवधि में मृत्यु हो जाने पर आश्रित परिवार को अधिकतम ₹50,000/- (पचास हजार रुपये) तक ही अनुग्रह राशि दी जाती है। यह राशि मूल वेतन, बैंड वेतन और ग्रेड वेतन के योग के छह माह के बराबर होती है।

संघ का कहना है कि प्रदेश के सभी शासकीय सेवक वर्तमान में सातवें वेतनमान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, ऐसे में ₹50,000 की सीमा आश्रित परिवारों के लिए अत्यंत अपर्याप्त है और इसे यथाशीघ्र संशोधित करने की आवश्यकता है।

मध्यप्रदेश का आदेश और तुलना

संघ ने तर्क दिया है कि मध्यप्रदेश शासन वित्त विभाग वल्लभ भवन मंत्रालय भोपाल द्वारा दिनांक 03 अप्रैल 2025 को जारी आदेश के अनुसार शासकीय सेवक की मृत्यु पर आश्रित परिवार को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अंतर्गत वेतन का छह गुना अधिकतम ₹1,25,000/- (एक लाख पच्चीस हजार रुपये) तक अनुग्रह अनुदान स्वीकृत किया जा रहा है।

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चूंकि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश से पृथक होकर हुआ था और मध्यप्रदेश री-ऑर्गनाइजेशन एक्ट की धारा 61 के तहत समय-समय पर वहां के प्रशासनिक निर्णय छत्तीसगढ़ में भी लागू किए जाते रहे हैं, इसलिए इस आदेश को भी छत्तीसगढ़ में लागू किया जाना चाहिए।

संघ का तर्क

जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने कहा कि –

“शासकीय सेवक प्रदेश की रीढ़ हैं। सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु होने पर उसके परिवार को उचित आर्थिक संबल मिलना बेहद जरूरी है। पचास हजार रुपये जैसी सीमित राशि आश्रितों के लिए पर्याप्त नहीं है। जब मध्यप्रदेश ने इसे बढ़ाकर ₹1,25,000 कर दिया है तो छत्तीसगढ़ शासन को भी इसे तत्काल लागू करना चाहिए।”

 

कर्मचारियों में असंतोष

संघ का कहना है कि मृत्यु पर मिलने वाली कम राशि के कारण कर्मचारियों में असंतोष है और परिवार आर्थिक संकट का सामना करते हैं। कई बार परिजन कर्ज और सामाजिक दवाब के कारण गंभीर स्थिति में आ जाते हैं।

संघ ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के हजारों शासकीय सेवकों के हित को देखते हुए इस नियम का पुनरीक्षण किया जाए और मृत्यु पर देय अनुग्रह राशि ₹1,25,000/- तक बढ़ाई जाए।

आगे की रणनीति

कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इस मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन की रणनीति बनाने को बाध्य होंगे।

छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ की यह मांग शासकीय सेवकों और उनके परिवारों से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे को उठाती है। अब देखना होगा कि शासन इस पर कब और क्या निर्णय लेता है।

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