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बसपा सुप्रीमो मायावती की नई सियासी तैयारी, मंडलवार कैंप करेंगी और पुराने नेताओं की घर वापसी करवाएंगी

फिर सक्रिय होंगी मायावती: मंडलवार कैंप करेंगी, पुराने चेहरों की घर वापसी पर फोकस

बसपा सुप्रीमो मायावती की नई सियासी तैयारी, मंडलवार कैंप करेंगी और पुराने नेताओं की घर वापसी करवाएंगी

कांशीराम की पुण्यतिथि के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर पार्टी को खड़ा करने की ठानी है। वे मंडलों में खुद कैंप करेंगी और पुराने चेहरों को पार्टी में लौटाने की रणनीति बना रही हैं।


लखनऊ। राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग की सबसे सफल मिसाल पेश करने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती अब एक बार फिर राजनीतिक मैदान में सक्रिय होने जा रही हैं। कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर) के बाद वह पूरी तरह नए जोश में नजर आ रही हैं और पार्टी को पुनर्जीवित करने की रणनीति बना चुकी हैं।

सूत्रों के अनुसार, 69 वर्षीय मायावती अब तक पार्टी कार्यालय तक सीमित थीं, जिससे कोर वोट बैंक में सेंध लगी थी। मगर अब उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी है।

नई रणनीति: मंडलवार कैंप और घर वापसी

बसपा सुप्रीमो की नई रणनीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. मंडलवार कैंप: मायावती अब खुद मंडलवार कैंप करेंगी। इसका उद्देश्य बसपा के स्थायी वोटर्स को दोबारा जोड़ना और जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता बढ़ाना है।
  2. पुराने चेहरों पर फोकस: मायावती ने पुराने और प्रभावशाली चेहरों की पार्टी में घर वापसी करवाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें ब्राह्मण नेताओं को भी शामिल किया जाएगा, जिनके बूते बसपा को मुख्य राजनीतिक धारा में लाया जा सके।
  3. सामाजिक समीकरण: कोर वोट बैंक को मज़बूत करने के साथ-साथ, पार्टी नए सामाजिक समीकरण बनाने पर भी काम करेगी।

आज़ाद समाज पार्टी और छोटे दल

बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद को यह एहसास है कि चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के नेतृत्व वाली आज़ाद समाज पार्टी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इसलिए, आने वाले समय में दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज होने की संभावना है।

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इसके अलावा, बसपा की नजर छोटे लेकिन सामाजिक आधार वाले दलों पर भी है। हाल के दिनों में:

  • सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर (जो राजनीति की शुरुआत बसपा से कर चुके हैं) मायावती के प्रति सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं।
  • निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद भी बसपा को लेकर सहज और संवादशील नजर आ रहे हैं।

यह उल्लेखनीय है कि सुभासपा और निषाद पार्टी, दोनों ही दल वर्तमान में एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं।

 

बसपा छोड़कर गए बड़े नेता

मायावती की ‘घर वापसी’ की रणनीति उन नेताओं पर केंद्रित होगी जो कभी बसपा का मजबूत स्तंभ रहे थे, लेकिन अब अन्य दलों में प्रभावशाली पदों पर हैं:

  • ब्रजेश पाठक (वर्तमान में यूपी के उपमुख्यमंत्री, भाजपा)
  • प्रतिभा शुक्ला (मंत्री, भाजपा)
  • दारा सिंह चौहान (कैबिनेट मंत्री, भाजपा)
  • बाबू सिंह कुशवाहा (सपा सांसद)
  • स्वामी प्रसाद मौर्य और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे पुराने नाम अब अन्य दलों में सक्रिय हैं।

मायावती की यह सक्रियता 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा को पुनर्जीवित करने और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की नई बुनावट शुरू करने का स्पष्ट संकेत है।


 

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