श्री राम जन्मभूमि, अयोध्या: 29 अक्टूबर को रामलला का अलौकिक श्रृंगार एवं आरती दर्शन
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि, विक्रम संवत 2082 (आज 29 अक्टूबर, बुधवार) के शुभ अवसर पर अयोध्या धाम में विराजमान संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी प्रभु श्री रामलला सरकार का अलौकिक श्रृंगार किया गया। प्रभु श्री राम आज भी भक्तों को अपने भव्य स्वरूप में दर्शन दे रहे हैं।
रामलला के दैनिक दर्शन और श्रृंगार
अयोध्या में प्रभु श्री रामलला का श्रृंगार प्रतिदिन बड़े ही भव्य रूप में किया जाता है, जिसमें मौसम और तिथि के हिसाब से विशेष व्यवस्थाएं होती हैं:
- श्रृंगार: रामलला को रोजाना अलग-अलग रूप में तैयार किया जाता है। उनकी विशेष फूलों की माला दिल्ली से मंगाई जाती है, जो उनके अलौकिक सौंदर्य को और बढ़ाती है।
- वस्त्र: रामलला को हर दिन और मौसम के हिसाब से अलग-अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं।
- गर्मियों में: सूती और हल्के वस्त्र।
- जाड़े (सर्दियों) में: स्वेटर और ऊनी वस्त्र।
रामलला की दैनिक आरती और भोग का समय
रामलला की दिनचर्या भक्तों के लिए दर्शन और सेवा का एक निर्धारित क्रम सुनिश्चित करती है:
| सेवा का प्रकार | समय | विवरण |
| पहली आरती (बाल भोग से पहले) | सुबह 6:30 बजे | रामलला को जगाने, लेप लगाने और स्नान करवाने के बाद पूजन शुरू होता है। |
| दर्शन प्रारंभ | सुबह 7:30 बजे | भक्तों के लिए दर्शन शुरू हो जाते हैं। |
| भोग आरती | दोपहर 12:00 बजे | दोपहर में भोग आरती की जाती है। |
| संध्या आरती | शाम 7:30 बजे | शाम की मुख्य आरती होती है। |
| शयन | रात 8:30 बजे | रामलला को शयन करवाया जाता है। |
| दर्शन समाप्ति | शाम 7:30 बजे | भक्तों के लिए दर्शन का अंतिम समय। |
रामलला को चार समय भोग लगाया जाता है, जिसमें हर दिन और समय के हिसाब से अलग-अलग व्यंजन परोसे जाते हैं। ये सभी व्यंजन राम मंदिर की रसोई में ही तैयार किए जाते हैं, जिसकी शुरुआत सुबह बाल भोग से होती है।









