राजस्थान में 1 से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव वर्ष कार्यक्रम | भगवान बिरसा मुंडा जयंती पर राज्यभर में सांस्कृतिक आयोजन

राजस्थान में 1 से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव वर्ष कार्यक्रम: भगवान बिरसा मुंडा जयंती पर होगी विशेष श्रृंखला

जयपुर, 31 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राजस्थान में भगवान बिरसा मुंडा जयंती के उपलक्ष्य में 1 से 15 नवंबर 2025 तक जनजातीय गौरव वर्ष के तहत विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी।

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जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने सभी गतिविधियों के सफल संचालन के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस अभियान का उद्देश्य जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं, संस्कृति और वीर नायकों के योगदान को जन-जन तक पहुंचाना है।


आयोजन की तैयारियां और उद्देश्य

शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती प्रतिभा वर्मा ने सभी विभागों को तैयारियों को अंतिम रूप देने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन राज्य की जनजातीय परंपरा, संस्कृति और स्वाभिमान को सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।

1 से 15 नवंबर तक कार्यक्रमों की श्रृंखला

राज्यभर में 15 नवंबर तक विविध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित होंगी —

  • 1 नवंबर: मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल्स और ईएमआरएस विद्यालयों में जनजातीय संस्कृति, परंपरा एवं कला विषयक चित्रकला प्रतियोगिता

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  • 2 नवंबर: सैचुरेशन ड्राइव के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने हेतु शिविरों का आयोजन

  • 3 नवंबर: विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और योगदान पर आधारित भाषण, निबंध, गीत और चित्रकला प्रतियोगिता

  • 4 नवंबर: महाविद्यालयों में भगवान बिरसा मुंडा विषयक भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं

  • 6 नवंबर: राजीविका द्वारा पंचायत समितियों में खिलौना निर्माण कार्यशालाएं तथा माडा क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुष्पांजलि अर्पण

इसी प्रकार 15 नवंबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

राजस्थान की जनजातीय परंपरा सामाजिक ताने-बाने की आत्मा

श्रीमती प्रतिभा वर्मा ने कहा —

“राजस्थान की जनजातीय परंपरा हमारे सामाजिक ताने-बाने की आत्मा है। भगवान बिरसा मुंडा जैसे महानायक हमारे प्रेरणा स्रोत हैं, जिनसे समर्पण, संघर्ष और स्वाभिमान की भावना सदैव जीवित रहेगी।”

जनजातीय गौरव वर्ष के कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए सभी विभागों और अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि राज्यभर में जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाई जा सके।