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अयोध्या में रामलला का अलौकिक श्रृंगार | चार बार लगता है भोग | लाइव दर्शन 7 नवंबर

अयोध्या में रामलला का अलौकिक श्रृंगार, चार समय का भोग और भव्य आरती में उमड़ा श्रद्धा का सागर

अयोध्या। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि, विक्रम संवत 2082 (7 नवंबर, शुक्रवार) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम में ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला का शुभ और अलौकिक श्रृंगार संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

हर दिन की तरह आज भी रामलला को चार समय भोग लगाया गया। मंदिर की रसोई में विशेष व्यवस्था के तहत भोग तैयार किया गया। बताया जाता है कि सुबह की शुरुआत बाल भोग से होती है, इसके बाद दोपहर का मुख्य भोग, संध्या भोग और रात में शयन भोग अर्पित किया जाता है।

रामलला को हर दिन और मौसम के अनुसार अलग-अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं।
गर्मियों में सूती और हल्के वस्त्र, जबकि सर्दियों में ऊनी वस्त्र और स्वेटर पहनाए जाते हैं। शुक्रवार को प्रभु का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें फूलों की माला दिल्ली से मंगाई गई थी।

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रामलला को प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे जगाया जाता है और पूजन शुरू होता है। इसके बाद स्नान, लेप और श्रृंगार की प्रक्रिया होती है।
दोपहर 12 बजे भोग आरती, शाम 7:30 बजे संध्या आरती, और रात 8:30 बजे शयन आरती की जाती है।
श्रद्धालु रात्रि 7:30 बजे तक ही दर्शन कर सकते हैं।

शुक्रवार को हुए इस अलौकिक श्रृंगार के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों ने “जय श्रीराम” के जयकारे लगाए। रामलला के दिव्य दर्शन और भव्य श्रृंगार ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।

अयोध्या में विराजमान प्रभु श्रीराम आज संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में पूजे जा रहे हैं। उनके दिव्य श्रृंगार और भोग की परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम भी दर्शाती है।

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