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अहमदाबाद प्लेन क्रैश: सुप्रीम कोर्ट ने कहा – पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, केंद्र और DGCA से जवाब तलब

अहमदाबाद एयर इंडिया क्रैश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हादसा पायलट की गलती नहीं थी। कोर्ट ने केंद्र और DGCA से जवाब मांगा। हादसे में 241 लोगों की मौत हुई थी।

अहमदाबाद प्लेन क्रैश पर सुप्रीम कोर्ट बोला: देश में कोई नहीं मानता यह पायलट की गलती थी; पिता की याचिका पर केंद्र और DGCA से मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद प्लेन क्रैश मामले में बड़ा बयान दिया है। अदालत ने कहा कि देश में कोई नहीं मानता कि यह हादसा पायलट की गलती से हुआ था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्या बागची की बेंच ने कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में भी पायलट पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाया गया है।

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यह टिप्पणी अदालत ने पायलट सुमित सभरवाल के 91 वर्षीय पिता पुष्कर राज सभरवाल की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। उन्होंने इस हादसे की स्वतंत्र जांच की मांग की है। कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार और DGCA से जवाब मांगा है। मामला अब 10 नवंबर को एक अन्य संबंधित याचिका के साथ सुना जाएगा।

12 जून को एअर इंडिया की अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI-171 क्रैश हो गई थी।
इस दर्दनाक हादसे में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर समेत कुल 241 लोगों की मौत हो गई थी।
जहां विमान गिरा, वहां मौजूद 29 स्थानीय लोगों की भी जान चली गई थी।
हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का निधन भी हुआ था।

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अदालत ने कहा –

“देश में कोई यह नहीं मानता कि यह पायलट की गलती थी। AAIB की रिपोर्ट में भी ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं है। इसका उद्देश्य दोष तय करना नहीं बल्कि भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।”

बेंच ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कोर्ट खुद स्पष्ट करेगा कि पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट में हादसे का जिम्मा पायलट पर डाला था। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाते हुए कहा —

“विदेशी मीडिया की रिपोर्टें भारत की न्यायिक प्रणाली को प्रभावित नहीं करेंगी। ऐसी रिपोर्टिंग घटिया है। अगर किसी को समस्या है तो वह विदेशी अदालत में जाए।”

  • AAIB की 12 जुलाई को जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में पायलट की कोई गलती नहीं बताई गई।

  • रिपोर्ट का गलत तरीके से कुछ अंश पब्लिश किया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

  • जांच पूरी होने तक गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है।

Praveen Dubey

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