Bihar Election Exit Poll 2025: NDA की प्रचंड वापसी के संकेत, JDU बनी बड़ी पार्टी, BJP पीछे

Bihar Election Exit Poll 2025: NDA की प्रचंड वापसी के संकेत, JDU बनी ‘बड़ी पार्टी’, BJP पीछे रह गई

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान के बाद आए एग्जिट पोल के आंकड़े नीतीश कुमार के लिए उत्साहजनक हैं। अलग-अलग सर्वे एजेंसियों के अनुमानों के अनुसार, राज्य में एनडीए (NDA) को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। इस बार जेडीयू (JDU) कई सर्वे में बीजेपी (BJP) से आगे निकलती दिख रही है।

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

क्या कहता है पोल ऑफ पोल्स?

पार्टी सीटों का अनुमान
BJP 75
JDU 67
RJD 58
कांग्रेस (INC) 13

सर्वे एजेंसियों जैसे दैनिक भास्कर, मैट्रिज-IANS, चाणक्य स्ट्रैटेजिस, TIF रिसर्च, पोलस्ट्रेट, पोल डायरी और न्यूज़18 के औसत आंकड़ों में NDA को 140 से अधिक सीटें मिलती दिख रही हैं।
वहीं, महागठबंधन (RJD+Congress) को 70–75 सीटों के बीच सिमटता अनुमानित किया गया है।

2020 की तुलना में बड़ा बदलाव

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)

2020 के विधानसभा चुनाव में JDU सिर्फ 43 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि इस बार उसे 60 से 80 सीटों तक मिलने का अनुमान है।
दूसरी ओर, RJD जो 2020 में 75 सीटों पर जीती थी, अब 50–60 सीटों तक सीमित दिख रही है।
BJP भी स्थिर प्रदर्शन करती नज़र आ रही है — 70–80 सीटों के अनुमान के साथ।

कौन सी एजेंसी ने क्या कहा?

  • मैट्रिज-IANS: BJP 65–73, JDU 67–75

  • चाणक्य स्ट्रैटेजिस: BJP 70–75, JDU 52–57

  • दैनिक भास्कर: BJP 72–82, JDU 59–68

  • TIF रिसर्च: BJP 64–71, JDU 64–71

  • पोलस्ट्रेट: BJP 68–72, JDU 55–60

  • पोल डायरी: BJP 87–95, JDU 81–89

नीतीश कुमार बने NDA के केंद्र

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान की पार्टी इस बार NDA का हिस्सा है, जिससे जेडीयू को कई सीटों पर सीधा फायदा मिल सकता है। 2020 में जहां LJP के कारण नीतीश को नुकसान हुआ था, इस बार स्थिति उलटती दिख रही है।

RJD और कांग्रेस के लिए झटका

महागठबंधन की तरफ से इस बार RJD और कांग्रेस को संयुक्त रूप से 70 से कम सीटों तक सीमित बताया जा रहा है।
हालांकि, 2020 की तरह एग्जिट पोल पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि तब भी अधिकतर सर्वे गलत साबित हुए थे।