मध्य प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की नई क्रांति: हर विधानसभा में खुलेगी कृषि यंत्र किराये की दुकान, विदिशा बन रहा ग्लोबल हब






मध्य प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की नई क्रांति: हर विधानसभा में खुलेगी ‘कृषि यंत्र किराये की दुकान’, विदिशा बन रहा ग्लोबल हब

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM


मध्य प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की नई क्रांति: हर विधानसभा में खुलेगी ‘कृषि यंत्र किराये की दुकान’, विदिशा बन रहा ग्लोबल हब

मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशेष निर्देशों के तहत राज्य के किसानों को बड़ी सहूलियत देने के लिए अब प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक “कृषि यंत्र किराये की दुकान” अनिवार्य रूप से खोले जाने की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाए जा रहे इस समयांतराल में इस महत्वाकांक्षी पहल के परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं, जिससे प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए अपने खेतों को आधुनिक कृषि उपकरणों से तैयार करना बेहद आसान हो गया है।


वर्तमान परिदृश्य: 5260 केंद्रों का संचालन और हर साल खुलेंगे 1060 नए केंद्र

राज्य सरकार की इस अभिनव योजना के तहत कृषि यंत्रीकरण को घर-घर तक पहुंचाने का खाका तैयार कर लिया गया है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस तरह के 5260 केंद्र सफलतापूर्व संचालित हो रहे हैं। किसानों की बढ़ती मांग और आधुनिक खेती की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तय किया है कि अब हर साल राज्य में 1060 नए कृषि यंत्र किराये की दुकानें स्थापित की जाएंगी।

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि जो छोटे और सीमांत किसान आर्थिक तंगी के कारण महंगे आधुनिक कृषि यंत्र नहीं खरीद पाते थे, वे अब न्यूनतम सेवा शुल्क (रेंटल चार्ज) पर आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकेंगे। खेत की जुताई से लेकर बुआई, निराई और कटाई तक के लिए आवश्यक हाई-टेक उपकरण अब आसानी से हर ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध होंगे।


विदिशा बना कृषि यंत्र निर्माण का ‘आदर्श मॉडल’

एक समय था जब किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों के लिए दूसरे राज्यों या आयातित मशीनों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज मध्य प्रदेश इस क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव में विदिशा जिले ने पूरे देश के सामने एक मिसाल पेश की है। विदिशा अब उच्च गुणवत्ता के कृषि यंत्रों के निर्माण का एक प्रमुख हब बन चुका है।

जिले में इस समय लगभग 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयाँ पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। यहाँ बनने वाले कृषि यंत्रों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ग्रेडर
  • लेवलर
  • हाइड्रालिक ट्रॉली
  • कल्टीवेटर
  • प्लाउ (हल)
  • लोडर और डिलोडर

ये सभी उपकरण खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की पैदावार बढ़ाने में बेहद मददगार साबित हो रहे हैं।


ग्लोबल मार्केट में बढ़ी विदिशा के उपकरणों की धाक

विदिशा की इन स्थानीय इकाइयों में तैयार होने वाले कृषि यंत्रों की गूँज अब केवल मध्य प्रदेश या देश के अन्य राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इनकी मांग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से बढ़ रही है।

वर्तमान में यहाँ निर्मित कृषि उपकरण 10 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर जिन देशों में विदिशा के कृषि यंत्रों की धूम है, उनमें प्रमुख हैं:

  • मेडागास्कर
  • नाइजीरिया
  • सूडान
  • यूगांडा
  • घाना
  • अल्जीरिया
  • ग्वाटेमाला
  • भूटान
  • नेपाल
  • बांग्लादेश
  • केन्या
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

यह उपलब्धि राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) और स्थानीय युवा उद्यमियों की मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिन्हें सरकार की नीतियों से वैश्विक बाजार तक पहुँचने का अवसर मिला है।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
17a09f88-37fa-496a-8923-b0e0bac9f15d

धरातल की तस्वीर: स्थानीय उद्यमियों की जुबानी, सफलता की कहानी

इस संपूर्ण बदलाव और औद्योगिक विकास के पीछे स्थानीय स्तर पर काम कर रहे उन उद्यमियों और निर्माताओं का बड़ा योगदान है, जिन्होंने छोटे पैमाने पर शुरुआत कर आज अपने कारोबार को अंतर्राष्ट्रीय फलक पर पहुँचा दिया है।

1. ऊषा एग्रो: स्थानीय बाजार से ग्लोबल पहचान तक

विदिशा के जाने-माने उद्यमी मानस गुप्ता (ऊषा एग्रो) खेती के काम आने वाले आधुनिक यंत्र जैसे लोडर, डिलोडर और कल्टीवेटर का बड़े पैमाने पर निर्माण करते हैं। अपने सफर के बारे में वे बताते हैं कि इस काम की शुरुआत उनके पिता ने वर्ष 1993 में एक छोटे स्तर पर की थी। धीरे-धीरे गुणवत्ता और किसानों के भरोसे के दम पर इसका विस्तार किया गया।

“हमारे सबसे बड़े ग्राहक हमारे अपने स्थानीय किसान हैं। हमारे उत्पादों का अधिकांश हिस्सा स्थानीय बाजार में ही खप जाता है, लेकिन अब हम देश के दूसरे राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी बड़े पैमाने पर सप्लाई कर रहे हैं। आज हमारे बनाए यंत्र 10 से ज्यादा देशों तक पहुँच रहे हैं। हमारा कुल कारोबार का दो-तिहाई हिस्सा देश के भीतर और एक-तिहाई कारोबार विदेशों में होता है। पूरे साल में हमारा कारोबार लगभग 4 करोड़ रुपये का है।” – मानस गुप्ता, ऊषा एग्रो

शासन से मिलने वाली मदद पर प्रकाश डालते हुए वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार से उन्हें हर कदम पर भरपूर सहयोग मिला है। उत्पादन से लेकर व्यवसाय के विस्तार और उत्पादों को विदेशों तक पहुँचाने में सरकारी नीतियों ने बहुत मदद की है। सरकार की ही पहल पर उन्हें जी-20 सम्मेलन में शामिल होने का अवसर मिला, जिसके यात्रा और व्यवस्था संबंधी खर्च का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा सरकार द्वारा वहन किया गया था।

2. संजय उद्योग: कोरोना संकट के बीच गढ़ी सफलता की इबारत

कोरोना महामारी के दौर में जब पूरा देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा था, तब विष्णु शर्मा (संजय उद्योग) ने वर्ष 2020 में कृषि उपकरणों के निर्माण का जोखिम उठाया और इसे एक अवसर में बदल दिया। वे ट्रैक्टर से संबंधित उपकरण जैसे कल्टीवेटर और प्लाउ का निर्माण करते हैं।

“हमने जब कोरोना संकट के दौरान इसकी शुरुआत की, तो हमें थोड़ी आशंका थी, लेकिन किसानों ने हमारे उत्पादों को हाथों-हाथ लिया। इससे हमारा उत्साह कई गुना बढ़ गया। हमारे उत्पादों की मुख्य आपूर्ति विदिशा और आसपास के जिलों के अलावा अन्य राज्यों में भी होती है। हमारा सालाना व्यवसाय करीब 50 लाख रुपये का है।” – विष्णु शर्मा, संजय उद्योग

सरकार से अपेक्षा जताते हुए वे कहते हैं कि आने वाले समय में उनके जैसे नए और युवा उद्यमियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण की और अधिक व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे गुणवत्ता में और निखार आ सके।

3. मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज और एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी का योगदान

विदिशा क्षेत्र के अन्य प्रमुख निर्माता विपिन रघुवंशी (मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज) और दीपक नरवरिया (मे. एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी) भी कृषि यंत्रीकरण की इस मुहिम को गति दे रहे हैं।

  • मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज के विपिन रघुवंशी का कहना है कि वे खेतों को तैयार करने से लेकर रोपनी, बुआई और कटाई तक के सभी स्तरों के लिए कल्टीवेटर, प्लाउ, लोडर और डिलोडर बनाते हैं। उनके अधिकांश उपकरण स्थानीय किसानों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करते हैं।
  • एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी के दीपक नरवरिया बताते हैं कि उनका बाजार मध्य प्रदेश के अलावा देश के कई अन्य राज्यों तक फैला हुआ है। हालांकि, उत्पादों का एक बड़ा हिस्सा विदिशा और आसपास के ग्रामीण इलाकों की माँग पूरी करने में ही खपत हो जाता है। उनका कुल सालाना कारोबार लगभग 3 करोड़ रुपये का है।

युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन और भविष्य की दिशा

सरकार की मंशा साफ है कि कृषि को केवल एक पारंपरिक व्यवसाय न रखकर इसे एक लाभकारी और आधुनिक उद्योग के रूप में स्थापित किया जाए। इसी उद्देश्य के तहत राज्य के युवाओं को कृषि उपकरण निर्माण, कृषि स्टार्टअप और सर्विस सेक्टर से जोड़ा जा रहा है। ‘कृषि यंत्र किराये की दुकानों’ के विस्तार से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

युवा उद्यमियों को आसान ऋण, तकनीकी प्रशिक्षण और विपणन में सहायता प्रदान करके सरकार उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही है। मध्य प्रदेश में कृषि और उद्योग का यह अनूठा संगम न केवल किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त कर रहा है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश’ के सपने को भी जमीन पर उतार रहा है।