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CM डॉ. मोहन यादव ने दी जलझूलनी एकादशी-डोल ग्यारस की शुभकामनाएं

विशेष राज्य रिपोर्ट: प्रदेश खबर डिजिटल टीम | तारीख: 23 सितंबर 2026 | श्रेणी: मध्य प्रदेश समाचार / धर्म-संस्कृति
“पावन पर्व जलझूलनी एकादशी (डोल ग्यारस) की सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। जगत के पालनहार भगवान श्रीविष्णु सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करें, सभी के जीवन में सुख-समृद्धि, प्रसन्नता और आरोग्य की वृद्धि करें, यही मेरी ईश्वर से विनम्र प्रार्थना है।”
— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पवित्र भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाले अत्यंत पावन पर्व जलझूलनी एकादशी और डोल ग्यारस के अवसर पर समूचे प्रदेश और देशवासियों को हार्दिक बधाई व मंगलकामनाएं प्रेषित की हैं। मुख्यमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश में जगतपालक भगवान श्रीहरि विष्णु एवं भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप का स्मरण करते हुए राज्य की निरंतर प्रगति, नागरिकों की सुख-शांति और समृद्धि की मंगल कामना की है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में पर्व और त्यौहार केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक भक्ति भाव को सुदृढ़ करने के सशक्त माध्यम हैं। जलझूलनी एकादशी और डोल ग्यारस का पर्व भगवान विष्णु के योगनिद्रा में करवट लेने और बाल गोपाल के जलविहार से जुड़ा एक अत्यंत पावन उत्सव है, जो भक्ति और परिवर्तन की प्रेरणा देता है।

1. मुख्यमंत्री का विशेष संदेश और जन-कल्याण की प्रार्थना

अपने आधिकारिक शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की पावन धरा हमेशा से सनातन संस्कृति, भक्ति और धार्मिक चेतना का केंद्र रही है। राज्य सरकार प्रदेश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव की पुनर्स्थापना के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान जगन्नाथ और श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद मध्य प्रदेश के हर गांव, गरीब, किसान, युवा और महिला पर सदैव बना रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि इस पावन अवसर पर हम सब एकजुट होकर राज्य में शांति, भाईचारे और समृद्धि के वातावरण को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि जब समाज में धार्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों की वृद्धि होती है, तो राज्य विकास के नित नए आयामों को स्पर्श करता है।

2. जलझूलनी एकादशी (डोल ग्यारस) का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देश के विभिन्न अंचलों में जलझूलनी एकादशी, डोल ग्यारस, परिवर्तिनी एकादशी, वामन एकादशी तथा पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है। सनातन परंपरा में इस तिथि का विशेष पौराणिक महत्व है:

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  • भगवान विष्णु की शयन करवट (परिवर्तिनी एकादशी): धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन चार माह के लिए योगनिद्रा में जाने के पश्चात भगवान विष्णु भाद्रपद शुक्ल एकादशी को करवट बदलते हैं। इसलिए इसे ‘परिवर्तिनी एकादशी’ कहा जाता है।
  • बाल गोपाल का जलविहार (जलझूलनी व डोल उत्सव): इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप (लड्डू गोपाल) को भव्य एवं सुसज्जित विमानों (डोल या बेवाण) में विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ जलाशय, नदी या सरोवर के तट पर ले जाया जाता है। वहां देव प्रतिमाओं को पवित्र जल से स्नान कराया जाता है और जलविहार (झूला) कराया जाता है, जिसके कारण इसे ‘जलझूलनी एकादशी’ और ‘डोल ग्यारस’ कहा जाता है।
  • वामन अवतार प्राकट्य: शास्त्रों के अनुसार इसी तिथि को कश्यप ऋषि और माता अदिति के घर भगवान विष्णु ने अपने पांचवें अवतार के रूप में वामन रूप में प्राकट्य लिया था। इस दिन वामन देव की पूजा से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।

3. मध्य प्रदेश में डोल ग्यारस उत्सव का भव्य आयोजन

मध्य प्रदेश के मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल अंचलों में डोल ग्यारस का पर्व अत्यंत पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। उज्जैन, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, देवास, धार और विदिशा जैसे प्रमुख शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशाल डोल जुलूस (बेवाण यात्राएं) निकाले जाते हैं।

अंचल / क्षेत्र उत्सव का स्वरूप विशेष परंपराएं
मालवा अंचल (उज्जैन, इंदौर, देवास) अखाड़ा प्रदर्शन एवं भव्य डोल यात्रा सुसज्जित बेवाणों में भगवान की सवारी, अखाड़ों द्वारा साहसिक कलाकृतियों का प्रदर्शन।
बुंदेलखंड अंचल (सागर, छतरपुर) जलाशय स्नान एवं भजन कीर्तन तालाबों के घाटों पर देव मूर्तियों का अभिषेक एवं महाआरती का आयोजन।
महाकौशल (जबलपुर, रीवा) मंदिरों में विशेष श्रृंगार व नौका विहार नर्मदा तटों पर भगवान के बाल स्वरूप का नौका विहार एवं दीपदान।

4. सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु राज्य सरकार के प्रयास

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार राज्य के पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के जीर्णोद्धार और लोक-उत्सवों के भव्य आयोजन के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। महाकाल लोक की तर्ज पर राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक सर्किटों का विकास किया जा रहा है, जिससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार को नई गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने उज्जैन महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और रामराजा सरकार की पावन धरा का स्मरण करते हुए राज्य की मंगल समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह शुभेच्छा मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और जन-कल्याण के प्रति समर्पित भाव को रेखांकित करती है। जलझूलनी एकादशी एवं डोल ग्यारस का यह पवित्र अवसर प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मकता, नई ऊर्जा, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर प्रगति का मार्ग प्रशस्त करे, यही सब की मंगल कामना है।

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