झंडेवालान बाबा पीर रतननाथ मंदिर में तोड़फोड़ पर बवाल, RSS विस्तार का आरोप; अजय माकन ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

1400 साल पुराने बाबा पीर रतननाथ मंदिर पर कार्रवाई को लेकर बवाल, RSS मुख्यालय विस्तार का आरोप; अजय माकन ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

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दिल्ली के झंडेवालान स्थित ऐतिहासिक बाबा पीर रतननाथ मंदिर परिसर में 29 नवंबर को हुई DDA–MCD की संयुक्त कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया और उसके बाद इलाके में स्टील शटरिंग लगाकर नाकेबंदी कर दी गई।

वहीं कई लोगों और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि यह कार्रवाई झंडेवालान स्थित RSS मुख्यालय ‘केशव कुंज’ के कथित विस्तार, विशेषकर पार्किंग और रास्ता बनाने के लिए की गई। हालांकि DDA की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


राज्यसभा में गरजे अजय माकन, सरकार से तीन मांगें

राज्यसभा सांसद अजय माकन ने संसद में यह मामला जोरदार तरीके से उठाया और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि:

अजय माकन की तीन मांगें

  1. केशव कुंज के लिए मंदिर भूमि लेने के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच हो।
  2. मंदिर की नाकेबंदी हटाई जाए और तोड़े गए हिस्सों का पुनर्निर्माण कराया जाए।
  3. GRAP नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।

माकन ने कहा कि यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि नाथ संप्रदाय की दुर्लभ और प्राचीन परंपरा का केंद्र है, जिसे प्रशासन ने कुचल दिया है। उन्होंने सवाल उठाया –
“क्या एक संगठन के कार्यालय के लिए रास्ता और पार्किंग बनाने के नाम पर 1400 साल पुरानी आस्था कुचल दी जाएगी?”

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नाथ परंपरा और पीर रतननाथ जी की विरासत

यह मंदिर साधारण धार्मिक स्थल नहीं माना जाता, बल्कि हर श्रीनाथ परंपरा और पीर रतननाथ जी की गद्दी से जुड़ा है।

  • इसका मूल केंद्र कभी पेशावर और अफगानिस्तान रहा है।
  • पेशावर के झंडा बाजार में स्थित दरगाह पीर रतननाथ जी आज भी पाकिस्तान में बचे कुछ हिंदू मंदिरों में शामिल है।
  • विभाजन के बाद बाबा मनमोहन दास इस संप्रदाय की जोत लेकर दिल्ली आए और झंडेवालान में इस मंदिर की स्थापना की।

इस कारण यह मंदिर भारत आए पाकिस्तान शरणार्थी हिंदू समुदाय की आस्था का केंद्र भी माना जाता है।


GRAP-II/III के दौरान ध्वस्तीकरण पर उठे सवाल

दिल्ली में प्रदूषण के चलते उस अवधि में GRAP-II/III लागू था, जिसके तहत निर्माण और ध्वस्तीकरण पर सख्त प्रतिबंध था।

इसके बावजूद, स्थानीय लोगों के मुताबिक

  • सुबह भारी पुलिस बल के बीच बुलडोजर चलाया गया,
  • मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों को गिराया गया,
  • बाद में पूरे क्षेत्र को स्टील शटरिंग से घेर दिया गया।

इसे लेकर लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है।


राजनीतिक तापमान बढ़ा

इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर प्रशासनिक दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
अजय माकन का कहना है कि:
“यह सिर्फ दिल्ली का नहीं, बल्कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आज भी कठिन परिस्थितियों में हिंदू धर्म को बचाए हुए समुदाय की भावनाओं पर चोट है।”

DDA की चुप्पी और आरोपों को लेकर दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है।