अंबिकापुर: धान उपार्जन केन्द्रों में पारदर्शी व्यवस्था से किसानों का भरोसा बढ़ा, मिले 3100 रुपये प्रति क्विंटल

धान उपार्जन केन्द्रों में सुगम व्यवस्था से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा

किसान बैजनाथ सिंह बोले— पारदर्शी प्रक्रिया से बड़ी राहत**

file_000000000ae07206b6dd6cb6073112cd
WhatsApp Image 2026-03-12 at 6.47.26 PM (1)
file_000000009a407207b6d77d3c5cd41ab0

अंबिकापुर, 11 दिसंबर 2025। ज़िले में धान उपार्जन केंद्रों में लागू की गई पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था का लाभ सीधे किसानों तक पहुँच रहा है। जिला प्रशासन द्वारा उपार्जन केंद्रों में की गई सुदृढ़ व्यवस्थाओं की किसानों ने सराहना की है। किसानों ने बताया कि इस वर्ष धान खरीदी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुगम, सरल और पारदर्शी हो गई है।


व्यवस्थाओं की किसानों ने की तारीफ

धान उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करते समय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को पूरी तरह संतोषजनक बताया। किसानों ने भी माना कि इस बार की सुव्यवस्थित प्रक्रिया से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

ग्राम पंचायत खाला, अंबिकापुर ब्लॉक के किसान श्री बैजनाथ सिंह ने बताया कि उपार्जन केंद्र पहुंचते ही समिति कर्मचारियों ने पूरा सहयोग किया।

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
  • धान का नमी परीक्षण तुरंत किया गया।
  • बारदाना समय पर उपलब्ध कराया गया।
  • तौल प्रक्रिया पारदर्शी रही।

उन्होंने बताया कि इन प्रबंधों से किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है।


मुख्यमंत्री की घोषित समर्थन मूल्य से मिली बड़ी राहत

किसान बैजनाथ ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान का मूल्य प्रदान कर बड़ी राहत दी है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा— “धान की राशि प्राप्त होने के बाद हम खेती का दायरा बढ़ा रहे हैं और बच्चों को उच्च शिक्षा दिला पा रहे हैं। सरकार की यह व्यवस्था किसानों के लिए प्रोत्साहन का काम कर रही है।”


सहज टोकन प्रक्रिया— बिना किसी परेशानी के

किसान बैजनाथ सिंह ने बताया कि उनके पास कुल 160 क्विंटल धान का रकबा है।
उन्होंने पहला 80 क्विंटल का टोकन कटवाया और प्रक्रिया पूरी तरह सहज रही।

नमी परीक्षण से लेकर तौल तक किसी भी चरण में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।