नगर निगम चुनावों की घोषणा से महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल

महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनाव की घोषणा के साथ राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। धुले की पूर्व महापौर कल्पना महाले के BJP में शामिल होने से शरद पवार गुट की NCP को बड़ा झटका लगा है।

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महाराष्ट्र। चुनाव आयोग द्वारा नगर निगम चुनावों की घोषणा के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। 15 दिसंबर को आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग ने राज्य की 29 नगर पालिकाओं के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया।

घोषणा के अनुसार,

  • मतदान: 15 जनवरी 2026
  • मतगणना: 16 जनवरी 2026

गठबंधनों में असमंजस, फ्रेंडली फाइट के आसार

सत्तारूढ़ महायुति (बीजेपी-एनसीपी-शिवसेना) और विपक्षी महाविकास अघाड़ी—दोनों खेमों में गठबंधन को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। कई नगर निगमों में यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टियां एक साथ चुनाव लड़ेंगी या फ्रेंडली फाइट देखने को मिलेगी।

कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्षी खेमे में शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे गठबंधन कर सकती हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा नगर निगमों में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सके।

वहीं, कई नगर निगम ऐसे भी हैं जहां न तो भाजपा पीछे हटने को तैयार है और न ही शिवसेना और एनसीपी।

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धुले में शरद पवार गुट को बड़ा झटका

चुनावी घोषणा के साथ ही शरद पवार गुट की एनसीपी को पहला बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
धुले की पूर्व महापौर कल्पना महाले अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गई हैं।

पालक मंत्री जयकुमार रावल की उपस्थिति में कल्पना महाले ने भाजपा का दामन थामा। उनके साथ

  • पूर्व शिवसेना पार्षद गुलाब माली
  • कैलाश मराठे
    भी भाजपा में शामिल हुए।

धुले में BJP और मजबूत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटनाक्रम शरद पवार गुट के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। धुले नगर निगम पर पहले से ही भाजपा का कब्जा है और कल्पना महाले के शामिल होने से पार्टी की स्थिति और मजबूत हो गई है।

मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि

“जहां संभव होगा, वहां नगर निगम चुनाव गठबंधन में लड़े जाएंगे।”

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुणे में भाजपा और एनसीपी (अजित पवार गुट) अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे।

राजनीतिक समीकरणों में तेजी से बदलाव

स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए भाजपा में लगातार नए नेताओं का प्रवेश जारी है। इन दलबदल से न केवल शरद पवार गुट, बल्कि शिंदे गुट और महाविकास अघाड़ी को भी बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

अब आने वाला समय ही बताएगा कि किन नगर निगमों में गठबंधन कायम रहेगा और कहां सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।