केंद्रीय मदद से रायपुर निगम को मिल सकते हैं 300 करोड़, गंज मंडी, पेयजल और प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम होंगे हाईटेक

रायपुर। केंद्र सरकार की सहायता से रायपुर नगर पालिक निगम को शहर के बड़े विकास कार्यों के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलने की संभावना है। 16 दिसंबर को निगम द्वारा प्रस्तुत किए गए ऑनलाइन प्रेजेंटेशन के बाद केंद्र सरकार ने प्रस्तावित योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। इस प्रेजेंटेशन में निगम आयुक्त विश्वदीप सहित योजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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26 एकड़ गंज मंडी प्रोजेक्ट को मिल सकती है 100 करोड़ की शुरुआती मदद

केंद्रीय मदद से 26 एकड़ गंज मंडी प्रोजेक्ट के लिए निगम को बड़ी राशि मिल सकती है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग के लिए कंसल्टेंट नियुक्ति की प्रक्रिया की जानकारी पहले ही केंद्र को दे दी गई है। कंसल्टेंट नियुक्ति की गारंटी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने सितंबर महीने में ही 100 करोड़ रुपये की शुरुआती सहायता का प्रस्ताव दिया था। मंगलवार को हुई प्रेजेंटेशन में इस विषय पर लंबी चर्चा हुई।

पेयजल आपूर्ति सिस्टम होगा हाईटेक

केंद्रीय सहायता से रायपुर शहर के पेयजल आपूर्ति सिस्टम को मेट्रो सिटी की तर्ज पर हाईटेक किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में आवश्यकता से अधिक पानी की खपत हो रही है। यदि इस अंधाधुंध आपूर्ति पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में शहर को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र का जल संसाधन विभाग राजधानी के लिए नई प्लानिंग तैयार करेगा।

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प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव

नगर निगम में प्रॉपर्टी टैक्स सिस्टम को भी मजबूत करने की तैयारी है। इसके तहत निगम के सॉफ्टवेयर को जिला प्रशासन के रजिस्ट्री पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इससे प्रॉपर्टी खोजने और डिमांड नोटिस जारी करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि नए हाईटेक सिस्टम से एक क्लिक में खाली प्लॉट, निर्माणाधीन मकान और टैक्स दायरे में आने वाली सभी प्रॉपर्टी सूचीबद्ध हो जाएंगी। इस सॉफ्टवेयर को तैयार करने में केंद्रीय एजेंसी भी सहयोग करेगी, जिससे शहर सीमा क्षेत्र में नई प्रॉपर्टी चिन्हांकन में भी आसानी होगी।

GIS बेस्ड सर्वे से सुधरेगा रेड जोन का सिस्टम

यदि केंद्र से फंडिंग को मंजूरी मिलती है तो शहर के उन इलाकों में, जो अंडरग्राउंड वाटर के मामले में रेड जोन घोषित हैं, वहां GIS बेस्ड सर्वे के बाद ठोस सुधारात्मक प्लानिंग शुरू की जाएगी। इसके साथ ही जनहित से जुड़े अन्य छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स पर भी फोकस किया जाएगा।