Advertisement

Muslim Divorce Law: भरण-पोषण नहीं देने पर पत्नी को तलाक का अधिकार, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Muslim Divorce Law: भरण-पोषण नहीं देने पर पत्नी को तलाक का अधिकार, हाईकोर्ट का अहम फैसला

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुस्लिम विवाह कानून से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि पति लगातार दो वर्षों तक पत्नी का भरण-पोषण नहीं करता, तो पत्नी को तलाक (विवाह विच्छेद) का अधिकार मिलेगा, भले ही वह अपने मायके में रह रही हो।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के तलाक आदेश को आंशिक रूप से सही ठहराते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।


फैमिली कोर्ट के आदेश में क्या बदला हाईकोर्ट ने?

हालांकि, हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस निष्कर्ष को पलट दिया, जिसमें पति पर पत्नी की संपत्ति हड़पने या उसके कानूनी अधिकारों में बाधा डालने का आरोप स्वीकार किया गया था।

कोर्ट ने कहा—

“केवल एफडी तुड़वाने की मांग का आरोप पर्याप्त नहीं है, जब तक यह साबित न हो कि वास्तव में पत्नी की संपत्ति का दुरुपयोग किया गया हो।”

लेकिन इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भरण-पोषण न देना अपने आप में तलाक का पर्याप्त आधार है।

Gemini_Generated_Image_fohysbfohysbfohy
WhatsApp-Image-2026-03-12-at-6.48.17-PM-1-298x300 (1)
sjjj

कानून की व्याख्या में क्या कहा हाईकोर्ट ने?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 की धारा 2(ii) में कहीं भी यह शर्त नहीं है कि पत्नी पति के साथ ही रह रही हो।

रिकॉर्ड के आधार पर कोर्ट ने माना कि:

  • वर्ष 2016 से लगभग 8 वर्षों तक पत्नी को कोई भरण-पोषण नहीं दिया गया
  • यह स्थिति कानूनन तलाक का ठोस आधार बनाती है

क्या है पूरा मामला?

यह मामला कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ का है।

  • 30 सितंबर 2015 को मुस्लिम रीति-रिवाज से विवाह हुआ
  • शादी के बाद पत्नी केवल 15 दिन ससुराल में रही
  • पारिवारिक विवाद के चलते मई 2016 से मायके में रहने लगी

पत्नी का आरोप था कि पति ने:

  • उसके नाम की 10 लाख रुपये की एफडी तुड़वाने का दबाव बनाया
  • इसके बाद उसने घरेलू हिंसा, धारा 498-ए और भरण-पोषण से जुड़े प्रकरण दर्ज कराए

इन तथ्यों के आधार पर फैमिली कोर्ट ने पहले विवाह विच्छेद का आदेश दिया था।


हाईकोर्ट का संदेश

हाईकोर्ट ने तलाक के आदेश को भरण-पोषण न देने के आधार पर बरकरार रखते हुए यह संदेश दिया कि:

  • मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार मौलिक हैं
  • पति की जिम्मेदारी केवल साथ रहने तक सीमित नहीं
  • आर्थिक उपेक्षा भी वैधानिक रूप से तलाक का आधार बन सकती है

 

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.38
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.39 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.50.40 (1)
WhatsApp-Image-2026-08-15-at-00.21.47