MAK Pataudi: 21 साल में टेस्ट कप्तान बनने वाले ‘टाइगर’, जिन्होंने बदली भारतीय क्रिकेट की सोच

बीसीसीआई ने मनाई पूर्व टेस्ट कप्तान मंसूर अली ख़ान पटौदी की 85वीं जयंती, क्रिकेट जगत ने दी श्रद्धांजलि

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मंसूर अली ख़ान पटौदी भारतीय क्रिकेट के सबसे युवा टेस्ट कप्तान रहे। उनकी 85वीं जयंती पर जानिए ‘टाइगर पटौदी’ का पूरा क्रिकेट सफर, कप्तानी रिकॉर्ड और भारतीय टीम को दी गई नई पहचान।

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के पूर्व टेस्ट कप्तान और महान क्रिकेटर मंसूर अली ख़ान पटौदी (MAK Pataudi) की 85वीं जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

BCCI ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए पटौदी को भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक अविस्मरणीय अध्याय बताया। मंसूर अली ख़ान पटौदी, जिन्हें क्रिकेट जगत में ‘टाइगर पटौदी’ के नाम से भी जाना जाता है, ने बेहद कम उम्र में भारतीय टेस्ट टीम की कमान संभाली और अपने नेतृत्व से टीम को नई पहचान दिलाई।

पटौदी न केवल एक शानदार बल्लेबाज़ और बेहतरीन फील्डर थे, बल्कि उनके कप्तानी कौशल ने भारतीय क्रिकेट को आत्मविश्वास और आक्रामकता का नया आयाम दिया। उनके योगदान को आज भी क्रिकेट प्रेमी और खिलाड़ी प्रेरणा के रूप में याद करते हैं।

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मंसूर अली ख़ान पटौदी (MAK Pataudi) भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जिन्होंने केवल खेल ही नहीं, बल्कि टीम इंडिया की मानसिकता को भी बदला। बेहद कम उम्र में टेस्ट कप्तान बनने वाले पटौदी को आज भी ‘टाइगर पटौदी’ के नाम से याद किया जाता है।

करियर टाइमलाइन: MAK पटौदी

  • 1941: जन्म – भोपाल
  • 1961: इंग्लैंड के खिलाफ 21 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू
  • 1962: महज 21 साल 77 दिन में भारत के सबसे युवा टेस्ट कप्तान बने
  • 1962–1975: 40 टेस्ट में भारत की कप्तानी
  • 1968: न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली विदेशी टेस्ट सीरीज़ जीत
  • 1971: इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में ऐतिहासिक जीत की नींव रखने वाली टीम के सूत्रधार
  • 1975: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास
  • कप्तानी की खासियत
  • विदेशी धरती पर खेलने से डरने वाली टीम इंडिया को आत्मविश्वास दिया
  • तेज़ फील्डिंग और आक्रामक क्रिकेट को बढ़ावा
  • युवा खिलाड़ियों को मौके देकर भविष्य की मजबूत टीम तैयार की

 सम्मान और विरासत

  • पद्म श्री (1972)
  • BCCI ने उनके सम्मान में पटौदी ट्रॉफी शुरू की
  • आज भी भारतीय कप्तानी के सबसे प्रेरणादायक चेहरों में शामिल

क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पटौदी का दौर न होता, तो भारतीय क्रिकेट को विदेशी मैदानों पर जीत का आत्मविश्वास इतनी जल्दी नहीं मिलता।