HPZ Token निवेश घोटाला: ईडी ने दाखिल की सप्लीमेंट्री चार्जशीट, ₹2200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
दीमापुर/कोहिमा, 19 जनवरी 2026 | HPZ Token निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (SPC) दाखिल की है। ईडी की दीमापुर सब-जो़नल ऑफिस द्वारा यह शिकायत 12 जनवरी 2026 को माननीय विशेष न्यायालय (PMLA), दीमापुर में प्रस्तुत की गई, जिसे अदालत ने संज्ञान में ले लिया है।
ईडी ने यह जांच साइबर क्राइम थाना कोहिमा (नागालैंड) में दर्ज एफआईआर (क्राइम नंबर 03/2021, दिनांक 08.10.2021) के आधार पर शुरू की थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस घोटाले से जुड़े अन्य मामले गुवाहाटी CID, तथा CBI, दिल्ली में दर्ज एफआईआर से जुड़े हुए हैं, जिन्हें भी जांच में शामिल किया गया।
देशभर के निवेशकों से ठगी
ईडी की जांच में सामने आया कि HPZ Token App के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में फैले हजारों निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर ठगा गया। यह एक बड़े पैमाने का निवेश घोटाला है, जिसमें म्यूल अकाउंट्स, शेल कंपनियां, डमी डायरेक्टर्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स का दुरुपयोग कर अपराध की आय (POC) को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
Bhupesh Arora मुख्य आरोपी
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस घोटाले में जुटाई गई रकम को ICICI बैंक के म्यूल अकाउंट्स के जरिए एकत्र किया गया और फिर कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। PayU, Aggrepay, Easebuzz जैसे पेमेंट एग्रीगेटर्स की सेवाओं का दुरुपयोग कर धन शोधन किया गया।
ईडी के अनुसार, इस नेटवर्क को भूपेश अरोड़ा और उसके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। आरोपी पर आरोप है कि उसने शेल कंपनियों, हवाला ऑपरेटर्स और विदेशी मुद्रा एक्सचेंजर्स के जरिए भारी मात्रा में धन शोधन किया। भूपेश अरोड़ा फिलहाल ईडी की हिरासत में है और उस पर इसी तरह के एक अन्य निवेश ऐप घोटाले का भी मामला दर्ज है।
₹2200 करोड़ की अपराध आय, ₹650 करोड़ अटैच
ईडी ने बताया कि इस मामले में लगभग ₹2200 करोड़ की अपराध आय (POC) की पहचान की गई है। हालांकि समय रहते कार्रवाई करते हुए ईडी ने जांच के दौरान ₹650 करोड़ की राशि को कुर्क (अटैच) कर लिया, जो विभिन्न म्यूल खातों में जमा थी। कुछ राशि हवाला नेटवर्क के जरिए विदेश भेजे जाने के भी सबूत मिले हैं।
मामले में मुख्य अभियोजन शिकायत पहले ही 4 मार्च 2024 को दाखिल की जा चुकी है और केस वर्तमान में विचाराधीन है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जांच जारी है।










