
भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण को मिली रफ्तार, प्रगति के हस्तक्षेप से बढ़ी क्षमता और कार्यकुशलता
भिलाई इस्पात संयंत्र का आधुनिकीकरण और विस्तार 2007 में स्वीकृत हुआ था, जो वर्षों तक लंबित रहा। प्रगति कार्यक्रम के हस्तक्षेप से परियोजना पूरी हुई और उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ।
नई दिल्ली/भिलाई।भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार परियोजना को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB Hindi) के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2007 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन यह एक दशक से अधिक समय तक लंबित रही।
मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी में बताया गया है कि प्रगति (PRAGATI) कार्यक्रम के हस्तक्षेप के बाद आधुनिकीकरण कार्यक्रम को पूरा किया गया। इसके परिणामस्वरूप भिलाई इस्पात संयंत्र की उत्पादन क्षमता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
प्रगति कार्यक्रम का उद्देश्य केंद्र और राज्य स्तर की प्रमुख परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर उन्हें समयबद्ध रूप से पूरा करना है। भिलाई इस्पात संयंत्र का मामला इसका उदाहरण माना जा रहा है, जहां लंबे समय से अटकी परियोजना को गति मिली।
इस परियोजना के पूरा होने से न केवल इस्पात उत्पादन को बढ़ावा मिला है, बल्कि क्षेत्रीय रोजगार और औद्योगिक विकास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।











