Advertisement

ओडिशा की सिंचाई विरासत की पहचान बनी बैतरणी सिंचाई परियोजना, 144 वर्षों से किसानों की जीवनरेखा

ओडिशा की सिंचाई विरासत की जीवंत मिसाल है बैतरणी सिंचाई परियोजना, 144 वर्षों से किसानों की जीवनरेखा बनी

ओडिशा।ओडिशा की कृषि अर्थव्यवस्था, जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास की आधारशिला मानी जाने वाली बैतरणी सिंचाई परियोजना आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत और सतत उपयोगिता के कारण चर्चा में है। स्वतंत्रता-पूर्व काल में पूर्ण हुई यह परियोजना बीते 144 वर्षों से अधिक समय से निरंतर किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान कर रही है और राज्य की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है।

जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD & GR) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बैतरणी सिंचाई परियोजना केवल एक सिंचाई ढांचा नहीं, बल्कि ओडिशा के जल प्रबंधन में दूरदर्शी सोच, तकनीकी दक्षता और सतत विकास का जीवंत उदाहरण है।

स्वतंत्रता-पूर्व काल की दूरदर्शी परियोजना

बैतरणी सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 1871 में प्रारंभ हुआ और इसे 1878 में पूर्ण किया गया। उस समय सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद इस परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया कि यह दशकों तक लगातार कार्य कर सके। आज भी यह परियोजना पूरी क्षमता के साथ सक्रिय है, जो इसे देश की सबसे पुरानी और सफल सिंचाई परियोजनाओं में शामिल करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना उस दौर की इंजीनियरिंग क्षमता और कृषि आवश्यकताओं की गहरी समझ को दर्शाती है। यही कारण है कि यह आज भी ओडिशा के किसानों के लिए भरोसेमंद जल स्रोत बनी हुई है।

जाजपुर जिले में कृषि को मिलती है बड़ी राहत

बैतरणी सिंचाई परियोजना के अंतर्गत जाजपुर ज़िले के बुद्धा एनीकट से संचालित जाजपुर नहर प्रणाली एक प्रमुख घटक है। इस प्रणाली के माध्यम से खरीफ मौसम में लगभग 13,099 हेक्टेयर और रबी मौसम में करीब 3,238 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलता है।

इस क्षेत्र में धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसानों की फसल उत्पादकता बढ़ी है और मौसम पर निर्भरता कम हुई है।

भद्रक जिले में भी पहुंचता है जीवनदायिनी जल

परियोजना का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा भद्रक ज़िले के बैतरणी एनीकट से जुड़ी एचएलसी रेंज–III प्रणाली है। यह प्रणाली खरीफ में लगभग 19,669 हेक्टेयर और रबी में करीब 809 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5

भद्रक क्षेत्र में यह परियोजना सूखा प्रभावित समय में किसानों के लिए संजीवनी साबित होती है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को फसल विविधीकरण का अवसर मिला है और उनकी आय में भी सुधार हुआ है।

एनीकट और जलमार्ग संरचना की अहम भूमिका

बैतरणी सिंचाई परियोजना में अखुआपड़ा एनीकट और बुद्धा एनीकट से युक्त जलमार्ग मोड़ संरचना भी शामिल है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 463.93 मीटर है। यह संरचना जल प्रवाह को नियंत्रित करने, नहरों में संतुलित जल वितरण सुनिश्चित करने और बाढ़ की स्थिति में जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रकार की संरचनाएं आज भी आधुनिक जल परियोजनाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

कृषि अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती

दशकों से निरंतर सेवा देती यह परियोजना ओडिशा की कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बनी हुई है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से न केवल फसल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन की समस्या में भी कमी आई है।

किसानों का कहना है कि बैतरणी परियोजना के कारण उन्हें मानसून पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे खेती अधिक सुरक्षित और लाभकारी बनी है।

जल प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन

बैतरणी सिंचाई परियोजना जल प्रबंधन के साथ-साथ भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) में भी सहायक मानी जाती है। नियंत्रित जल प्रवाह और नहर प्रणाली के कारण आसपास के क्षेत्रों में जल स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, यह परियोजना पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी योगदान देती है, जिससे क्षेत्र में हरियाली और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की सोच से जुड़ाव

विशेषज्ञों का मानना है कि बैतरणी सिंचाई परियोजना आज की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) की मूल भावना को दशकों पहले ही साकार कर चुकी थी। “हर खेत को पानी” के लक्ष्य को यह परियोजना लंबे समय से जमीन पर उतार रही है।

विरासत और भविष्य की दिशा

आज जब देश आधुनिक सिंचाई परियोजनाओं, माइक्रो-इरिगेशन और स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में बैतरणी सिंचाई परियोजना यह संदेश देती है कि दूरदर्शी योजना और सतत रखरखाव किसी भी परियोजना को सदियों तक उपयोगी बना सकता है।

बैतरणी परियोजना केवल अतीत की उपलब्धि नहीं, बल्कि भविष्य की जल नीति के लिए भी एक प्रेरक मॉडल है। ओडिशा के खेतों में हरियाली, किसानों में समृद्धि और जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का यह प्रतीक आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक बना रहेगा।

 

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05