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PM-KUSUM योजना: आसान ऋण से सोलर खेती को रफ्तार, किसानों को मिल रही ऊर्जा और आय की सुरक्षा

PM-KUSUM योजना के तहत Agriculture Infrastructure Fund (AIF) के माध्यम से किसानों को आसान ऋण मिल रहा है, जिससे सोलर पंप और सोलर प्लांट तेजी से स्थापित हो रहे हैं और खेती आत्मनिर्भर बन रही है।

नई दिल्ली।किसानों के लिए सोलर ऊर्जा अपनाने की राह में सबसे बड़ी बाधा लंबे समय तक वित्तीय संसाधनों की कमी रही है। डीज़ल पंप और महंगी बिजली पर निर्भरता किसानों की लागत बढ़ाती रही, जबकि सोलर समाधान चाहकर भी वे इसे जमीन पर नहीं उतार पा रहे थे। इस चुनौती का समाधान बनकर उभरी है प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना, जिसने Agriculture Infrastructure Fund (AIF) के जरिए आसान ऋण उपलब्ध कराकर खेती में सोलर क्रांति को गति दी है।

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केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, PM-KUSUM के अंतर्गत आसान फाइनेंसिंग ने किसानों को इरादे से इंस्टॉलेशन तक तेजी से पहुंचने में मदद की है। अब सोलर पंप और फार्म-लेवल सोलर प्लांट केवल योजना नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बनते जा रहे हैं।

वित्तीय बाधा टूटी, सोलर अपनाने में तेजी

अब तक सोलर तकनीक की शुरुआती लागत किसानों के लिए बड़ा जोखिम थी। बैंक ऋण की जटिल प्रक्रिया, गारंटी की मांग और ब्याज दरें किसानों को पीछे हटने पर मजबूर कर देती थीं। PM-KUSUM को AIF से जोड़ने के बाद यह स्थिति तेजी से बदली है।

AIF के तहत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), सहकारी समितियों और ग्रामीण उद्यमियों को कम ब्याज दर पर संरचित ऋण मिल रहा है। इससे सोलर परियोजनाओं को वित्तीय मजबूती मिली है और बैंकों का भरोसा भी बढ़ा है।

PM-KUSUM के तीन घटक

PM-KUSUM योजना तीन प्रमुख घटकों पर आधारित है—

  • घटक-A: बंजर भूमि पर ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट
  • घटक-B: स्टैंडअलोन सोलर पंप
  • घटक-C: मौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड पंपों का सोलरीकरण

इन सभी घटकों में आसान ऋण की सुविधा ने योजना के क्रियान्वयन को तेज कर दिया है।

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किसानों को मिल रहा प्रत्यक्ष लाभ

देश के विभिन्न राज्यों से सामने आ रहे अनुभव बताते हैं कि सोलर पंप लगने के बाद किसानों का डीज़ल खर्च लगभग समाप्त हो गया है। बिजली कटौती की समस्या भी काफी हद तक खत्म हुई है। इससे सिंचाई समय पर हो पा रही है और फसल उत्पादन में स्थिरता आई है।

कई किसान घटक-A के तहत सोलर प्लांट लगाकर ग्रिड को बिजली बेच रहे हैं, जिससे उन्हें खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती

PM-KUSUM के तहत सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार भी सृजित हो रहे हैं। इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और तकनीकी सेवाओं से स्थानीय युवाओं को काम मिल रहा है। साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलने से पर्यावरणीय लाभ भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

बैंकों की भूमिका में बदलाव

AIF के संरचित ढांचे ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए कृषि-सोलर परियोजनाओं को सुरक्षित निवेश विकल्प बना दिया है। अब ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हो गई है, जिससे परियोजनाओं का क्रियान्वयन समय पर हो पा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा की ओर कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि PM-KUSUM केवल एक योजना नहीं, बल्कि किसानों को ऊर्जा सुरक्षा, आय सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल खेती की ओर ले जाने का माध्यम है। सोलर ऊर्जा के उपयोग से कृषि क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है, जो भारत के हरित लक्ष्यों के अनुरूप है।

भविष्य की खेती का मॉडल

PM-KUSUM और AIF का यह संयोजन आने वाले वर्षों में भारतीय खेती का नया मॉडल तैयार कर सकता है, जहां किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होंगे और खेती एक टिकाऊ व लाभकारी व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, जिस वित्तीय चुनौती ने कभी सोलर खेती की रफ्तार रोकी थी, वही आसान ऋण आज बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। PM-KUSUM योजना भारतीय कृषि को सोलर ऊर्जा से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही है।

 

Ashish Sinha

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