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DRDO ने गणतंत्र दिवस 2026 पर लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रदर्शन किया

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर DRDO ने भारतीय नौसेना के लिए विकसित लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रदर्शन किया, जो Mach 10 की गति से लक्ष्य भेद करने में सक्षम है।

77वें गणतंत्र दिवस पर DRDO ने दिखाया लंबी दूरी का एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम

नई दिल्ली | 27 जनवरी 2026 |77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपनी नई लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित की गई है और इसे विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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मिसाइल प्रणाली में एक विशेष लॉन्चर शामिल है, जो इसे तटीय सुरक्षा और समुद्री सतत निगरानी के लिए अत्यंत सक्षम बनाता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल स्थिर और गतिशील दोनों प्रकार के लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है, जिससे समुद्री सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि यह मिसाइल एक क्वासी-बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का पालन करती है और अत्यधिक गति (हाइपरसोनिक) से चलती है। इसकी गति प्रारंभ में Mach 10 तक पहुँचती है और औसतन Mach 5 बनाए रखती है, जिसमें कई स्किप्स शामिल हैं। यह तकनीकी विशेषता मिसाइल को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में अधिक सटीक और प्रभावी बनाती है।

DRDO के इस प्रदर्शन ने यह भी साबित किया कि भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी निरंतर प्रगति कर रही है। इस हाइपरसोनिक मिसाइल का विकास भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत और तटीय सुरक्षा को बढ़ाने में अहम योगदान देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में इस प्रकार की मिसाइलें नौसैनिक सामरिक रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।

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रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यह मिसाइल प्रणाली न केवल अत्याधुनिक तकनीक का उदाहरण है, बल्कि यह भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता और “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में DRDO की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की मिसाइलें भारत की सामरिक और रणनीतिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाती हैं।

77वें गणतंत्र दिवस पर यह प्रदर्शन न केवल भारतीय रक्षा क्षेत्र की तकनीकी प्रगति को दिखाने का अवसर था, बल्कि यह जनता और वैश्विक दर्शकों के सामने भारत की सामरिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का भी संदेश प्रस्तुत करता है। इस मिसाइल की क्षमता और हाइपरसोनिक गति ने विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों को भी प्रभावित किया।

इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट किया कि भारत सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इस प्रणाली के कार्यान्वयन से नौसैनिक संचालन अधिक प्रभावी, सुरक्षित और लक्ष्य-सटीक बनेंगे।

DRDO की यह हाइपरसोनिक मिसाइल भारतीय नौसेना को समुद्री रणनीति में महत्वपूर्ण बढ़त और मजबूती प्रदान करेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस प्रकार की मिसाइलों का इस्तेमाल भारत की समुद्री सुरक्षा और सामरिक प्रौद्योगिकी में नई क्रांति लेकर आएगा।

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