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दिल्ली दंगे: झूठे गवाह और मनगढ़ंत सबूतों पर अदालत की फटकार, इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल से बड़ा खुलासा

दिल्ली दंगे: झूठे गवाह, मनगढ़ंत सबूत और अदालतों की सख्त टिप्पणियाँ

नई दिल्ली। इंडियन एक्सप्रेस (17 सितंबर 2025) के विश्लेषण से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 2020 के दिल्ली दंगों के बाद दर्ज कई आपराधिक मामलों में आरोपियों को झूठे और मनगढ़ंत सबूतों के कारण बरी किया गया। अदालतों ने पाया कि पुलिस ने काल्पनिक गवाह, पुलिस द्वारा लिखवाए गए बयान और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसी गंभीर खामियाँ कीं।

अखबार की जाँच के अनुसार, जिन 116 मामलों में अगस्त 2025 तक निर्णय आया, उनमें 97 में आरोपित बरी हुए। कई फैसलों में न्यायाधीशों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। न्यू उस्मानपुर थाने से जुड़े एक मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने टिप्पणी की कि “जाँच अधिकारी द्वारा साक्ष्यों को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, जिससे आरोपियों के अधिकारों का गंभीर हनन हुआ है।”

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कुछ मामलों में गवाहों ने अदालत में कहा कि उनके बयान वास्तव में पुलिस द्वारा लिखवाए गए थे। कई जगहों पर पुलिसकर्मियों को ही झूठे गवाह के रूप में पेश करने की कोशिश की गई। अदालतों ने कहा कि यह रवैया कानून के शासन और न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचाता है।

मीडिया रिपोर्टों और अदालत के आदेशों से यह भी सामने आया कि पुलिस ने कई शिकायतों को गलत तरीके से जोड़ा, जिससे शिकायतकर्ता ही आरोपी बना दिया गया। मार्च 2020 और बाद की सुनवाइयों में न्यायाधीशों ने ऐसे कदमों को “स्पष्ट मूर्खता” और “कठोर रवैया” कहा।

विश्लेषकों के मुताबिक, यह मामला न केवल पुलिस की जांच प्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

(आलेख : सवेरा, अनुवाद : संजय पराते)


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