कांकेर | नगर पालिका में ऑनलाइन टेंडर घोटाले का आरोप, कांग्रेस ने सीएमओ पर लगाए गंभीर आरोप
कांकेर नगर पालिका में अब तक ऑफलाइन टेंडरों में भ्रष्टाचार की बातें सामने आती रही हैं, लेकिन अब ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में भी बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। नगर पालिका द्वारा अधोसंरचना मद से जारी किए गए करोड़ों रुपये के कार्यों के ऑनलाइन टेंडरों में नियमों को दरकिनार कर चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष यासीन कराणी ने नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री एवं प्रभारी मंत्री तथा कलेक्टर को लिखित ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
तीन टेंडरों में गड़बड़ी का आरोप
कांग्रेस नेता यासीन कराणी ने बताया कि नगर पालिका कांकेर द्वारा 24 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन माध्यम से तीन टेंडरों का प्रकाशन किया गया था। इनमें—
- टेंडर क्रमांक 182308
लागत राशि: 78.95 लाख रुपये
कार्य: पुराना कम्युनिटी हाल मरम्मत कार्य - टेंडर क्रमांक 182316
लागत राशि: 118.27 लाख रुपये
कार्य: न्यू कम्युनिटी हाल मरम्मत कार्य - टेंडर क्रमांक 182324
लागत राशि: 12.51 लाख रुपये
कार्य: नगर पालिका भवन रंगाई-पुताई कार्य
इन सभी टेंडरों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2026 निर्धारित थी।
टेंडर खुलने से पहले बैठक और साठगांठ का आरोप
यासीन कराणी ने आरोप लगाया कि 11 जनवरी 2026 की रात करीब 9 बजे, यानी आवेदन की अंतिम तिथि से चार दिन पहले, नगर पालिका कार्यालय में अधिकारियों द्वारा चहेती फर्मों को काम दिलाने के उद्देश्य से एक गोपनीय बैठक की गई। हालांकि बैठक में सहमति नहीं बन पाई और इसके बाद 7-8 फर्मों ने तीनों टेंडरों में आवेदन कर दिया।
आरोप है कि जब सभी फर्मों के आवेदन जमा हो गए, तो सीएमओ द्वारा जानबूझकर टेंडर खोलने की प्रक्रिया में देरी की गई।
नियम विरुद्ध तरीके से आवेदन वापस कराने का आरोप
कराणी ने कहा कि 27 और 28 जनवरी 2026 को टेंडर खुलने से पहले दो फर्मों से उनके स्वयं के लेटरहेड पर आवेदन लेकर यह लिखवाया गया कि पारिवारिक कारणों से उनका टेंडर न खोला जाए, जो कि टेंडर नियमों के स्पष्ट खिलाफ है।
इसके अलावा, कुछ फर्मों को लेन-देन के जरिए पात्र होने के बावजूद शपथ पत्र नहीं होने का हवाला देकर अपात्र घोषित कराया गया, जबकि यह प्रक्रिया भी नियमों के अनुरूप नहीं है।
एफडीआर लौटाने और शासन को नुकसान पहुंचाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि टेंडर खुलने से पहले ही कुछ ठेकेदारों की एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) वापस कर दी गई, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा संभव नहीं है। इससे शासन को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन टेंडर प्रकाशन में एसओआर दर 2024-25 दर्शाई गई, जबकि नगर पालिका के आंतरिक दस्तावेजों में एसओआर दर 2015 का उल्लेख है, जो गंभीर तकनीकी और वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है।
कराणी का दावा: जांच से सब होगा साफ
यासीन कराणी ने कहा कि यदि तीनों टेंडरों की निष्पक्ष जांच की जाए तो सभी फर्मों द्वारा जमा किए गए एफडीआर, ऑनलाइन दरें और पात्रता से जुड़े तथ्य साफ सामने आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि अधिकांश फर्मों ने तीनों कार्यों के लिए 15 प्रतिशत से अधिक रेट पर आवेदन किया था, ऐसे में नियमों के अनुसार एल-1 (सबसे कम दर) को पात्र माना जाना चाहिए था।
उन्होंने सवाल उठाया कि टेंडर आवेदन करने के बाद ठेकेदारों द्वारा आवेदन वापस लेने का प्रावधान नियमों में नहीं है, इसके बावजूद सीएमओ द्वारा अधिकांश आवेदनों को वापस कराया गया।
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
यासीन कराणी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नगरीय प्रशासन एवं प्रभारी मंत्री अरुण साव और कांकेर कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते जांच नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी।















