NCLT का बड़ा फैसला: एल्केमिस्ट लिमिटेड के खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया रद्द, ईडी को अहम कानूनी जीत

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक बड़ी कानूनी सफलता मिली है। माननीय राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT), नई दिल्ली ने अपने 03 फरवरी 2026 के आदेश में मेसर्स एल्केमिस्ट लिमिटेड के खिलाफ शुरू की गई कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) को यह कहते हुए पूरी तरह रद्द कर दिया कि यह प्रक्रिया धोखाधड़ी, मिलीभगत और गलत इरादे से शुरू की गई थी।

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माननीय अधिकरण ने न केवल सीआईआरपी को वापस ले लिया, बल्कि आईबीसी, 2016 की धारा 14 के तहत घोषित रोक को भी हटा दिया, साथ ही रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति और उनके द्वारा की गई सभी कार्रवाइयों को निरस्त कर दिया।


ऑपरेशनल क्रेडिटर पर 5 लाख का जुर्माना

न्यायालय ने कानून की प्रक्रिया के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग को गंभीर मानते हुए ऑपरेशनल क्रेडिटर साई टेक मेडिकेयर प्राइवेट लिमिटेड पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया।

अधिकरण ने स्पष्ट किया कि दिवालियापन की प्रक्रिया का इस्तेमाल आपराधिक जांच, जब्ती और निवेशकों को धन वापस दिलाने की कार्रवाई को बाधित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

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ईडी की जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताएं

ईडी की जांच में यह पाया गया कि एल्केमिस्ट समूह की कंपनियों द्वारा निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दिवालियापन की कार्यवाही का सहारा लेकर पीएमएलए (PMLA) के तहत चल रही जांच और संपत्ति जब्ती प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश की गई।

एनसीएलटी ने अपने आदेश में कहा कि:

  • आईबीसी एक लाभकारी कानून है, न कि धोखाधड़ी को वैध ठहराने का माध्यम।
  • दिवालियापन प्रक्रिया का उपयोग आपराधिक मामलों से बचने के लिए नहीं किया जा सकता।
  • पीएमएलए और आईबीसी की कार्यवाहियां अलग-अलग कानूनी क्षेत्रों में संचालित होती हैं।

कानूनी स्थिति की पुनः पुष्टि

एनसीएलटी के इस फैसले ने इस स्थापित कानूनी स्थिति की पुनः पुष्टि कर दी है कि दिवालियापन ढांचे का दुरुपयोग कर आपराधिक कानून, जब्ती और निवेशकों को धन वापसी की प्रक्रिया को विफल नहीं किया जा सकता।

यह आदेश ईडी के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है और भविष्य में इस तरह के मामलों में मजबूत मिसाल के रूप में देखा जाएगा।

एनसीएलटी का यह फैसला कॉर्पोरेट धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि कानून का दुरुपयोग कर आर्थिक अपराधों से बचने की कोशिश सफल नहीं होगी।