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चैत्र नवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त, घटस्थापना और व्रत के स्वास्थ्य टिप्स

चैत्र नवरात्रि 2026 : शुभ मुहूर्त, घटस्थापना व व्रत के दौरान स्वास्थ्य टिप्स

नई दिल्ली, 19 मार्च 2026:आस्था और उमंग से भरा पर्व चैत्र नवरात्रि 2026 कल यानी 19 मार्च, गुरुवार से आरंभ हो रहा है। पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि के आगमन के साथ ही यह महान उत्सव प्रारंभ होगा।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रतिवर्ष नवरात्रि के आरंभ का शुभ संकेत देती है। इस वर्ष चैत्र अमावस्या 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी और तत्पश्चात प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी, जो नवरात्रि के शुभ आरंभ का समय चिन्हित करेगी।

नवरात्रि का महत्व और घटस्थापना

नवरात्रि नौ दिनों तक चलने वाला हिंदू धर्म का एक प्रमुख धार्मिक पर्व है, जो माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। परंपरागत रूप से नवरात्रि घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ आरंभ होती है। घटस्थापना का उद्देश्य देवी का आह्वान कर घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करने से नकारात्मक प्रभावों का नाश होता है और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

शुभ मुहूर्त: घटस्थापना / कलश स्थापना

चैत्र नवरात्रि के शुभ आरंभ के लिए घटस्थापना या कलश स्थापना के लिए कुछ विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं:

🕐 अभिजीत मुहूर्त: 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
🕐 लाभ चौघड़िया: 12:29 बजे से 1:59 बजे तक
🕐 सुबह शुभ मुहूर्त: 6:54 बजे से 7:57 बजे तक

इन समयों में कलश स्थापना या घटस्थापना करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।

खरमास और पंचक का विवरण

चैत्र नवरात्रि के समय खरमास और पंचक का प्रभाव भी देखा जाता है:

खरमास: 15 मार्च से प्रारंभ
खरमास धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण अवधि होती है, जिसमें देवी तथा सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

पंचक:
पंचक 16 मार्च शाम 6:14 बजे से प्रारंभ होकर 20 मार्च रात 2:28 बजे तक रहेगा।
इस अवधि में मांसाहार, मछली तथा नकारात्मक कर्मों से परहेज करना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।

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नवरात्रि व्रत : स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यक निर्देश

नवरात्रि में कई लोग उपवास रखते हैं, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखना उतना ही आवश्यक है। यदि सही तरीके से व्रत किया जाए तो यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद भी कर सकता है, वरना कमजोरी, डिहाइड्रेशन, एसिडिटी तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

नीचे कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुझाव दिए जा रहे हैं:

1. पूरी तरह खाली पेट न रहें

लंबे समय तक भूखे रहने से ऊर्जा की कमी होती है। हर 2–3 घंटे में हल्का भोजन लें जैसे – फल (सेब/बेल्फल/केला/पपीता), मखाना, मूंगफली, दही या लस्सी।

2. पानी एवं लिक्विड का पर्याप्त सेवन

उपवास के दौरान डिहाइड्रेशन होना स्वाभाविक है। खूब पानी, नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी का सेवन करें।

3. संतुलित एवं पौष्टिक फलाहार

केवल आलू या तले‑भुने खाद्य पदार्थ न लें।
साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू/सिंघाड़े का आटा, उबली सब्जियाँ, फल, पनीर तथा दही लें।

4. अधिक तला‑भुना एवं मीठा से परहेज

अत्यधिक तला‑भुना तथा मीठा खाने से पेट संबंधी समस्या तथा वजन बढ़ने की आशंका रहती है।

5. ऊर्जा बनाए रखें

खजूर, बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स दिनभर ऊर्जा प्रदान करते हैं।

6. हल्की गतिविधियाँ

भारी व्यायाम से बचें। योग, प्राणायाम तथा हल्की वॉक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।

7. पर्याप्त नींद

कम से कम 7–8 घंटे नींद अवश्य लें ताकि शरीर ठीक से रिकवर हो सके।

8. स्वास्थ्य समस्या होने पर सावधानी

अगर किसी को डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर या कोई अन्य चिकित्सीय समस्या है, तो उपवास शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।

चैत्र नवरात्रि 2026 एक धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य‑संबंधी संतुलन का पर्व है। सही तरीके से घटस्थापना, शुभ मुहूर्त का निर्वाह तथा स्वास्थ्य‑संबंधी सावधानियाँ अपनाकर यह उत्सव आपके जीवन में सुख, समृद्धि व सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा।

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