Supriya Shrinate का मोदी सरकार पर हमला: Epstein फाइल, विदेश नीति और लोकतंत्र पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: Indian National Congress (@INCIndia) ने केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन Supriya Shrinate ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नीतियों, विदेश नीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।

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मोदी सरकार पर गंभीर आरोप

सु्प्रिया श्रीनेत ने कहा कि मोदी सरकार की “हर मोर्चे पर कलई खुल रही है” और सरकार से जुड़े लोगों की कथित “काली करतूतों का पर्दाफाश” हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि तथाकथित Epstein फाइल्स में सरकार से जुड़े कुछ नाम सामने आने की चर्चा है।

गौरतलब है कि अमेरिका में Epstein Files Transparency Act के तहत बड़ी संख्या में दस्तावेज जारी किए गए हैं, जिनमें कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का जिक्र अलग-अलग संदर्भों में सामने आया है।
हालांकि, इन दस्तावेजों में नाम आने का अर्थ प्रत्यक्ष दोष सिद्ध होना नहीं माना जाता और कई मामलों में संदर्भ अस्पष्ट भी रहे हैं।

विदेश नीति पर निशाना

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह “पूरी तरह विफल” रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी के कारण Pakistan, Russia और China जैसे देश एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने Donald Trump के सामने “सरेंडर” कर दिया, जिससे देश की संप्रभुता प्रभावित हुई।

लोकतंत्र और सोशल मीडिया पर चिंता

सु्प्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र कमजोर किया जा रहा है। उनके मुताबिक, आम जनता के पास सवाल पूछने का सबसे बड़ा माध्यम सोशल मीडिया है, लेकिन सरकार इस मंच को भी नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार “जनता की आवाज दबाने” के लिए हर संभव रास्ता बंद करना चाहती है, भले ही इसके लिए गैरकानूनी तरीके अपनाने पड़ें। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा है।

राजनीतिक माहौल गरम

कांग्रेस के इस बयान से देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों का जवाब आना बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Epstein फाइल्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भारत की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगे भी तेज हो सकता है, खासकर तब जब तथ्य और दावे दोनों अलग-अलग स्तर पर सामने आ रहे हों।