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अमित जोगी को उम्रकैद: जग्गी मर्डर केस में हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 21 दिन में सरेंडर का आदेश | Pradesh Khabar






अमित जोगी को उम्रकैद: जग्गी मर्डर केस में हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 21 दिन में सरेंडर का आदेश | Pradesh Khabar


Breaking News ब्यूरो रिपोर्ट: प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क
दिनांक: 06 अप्रैल, 2026

अमित जोगी को उम्रकैद: 23 साल पुराने ‘जग्गी मर्डर केस’ में हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल रामअवतार जग्गी हत्याकांड में आज न्याय का तराजू झुक गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के 2007 के उस फैसले को पूरी तरह पलट दिया है, जिसमें अमित जोगी को बरी किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों की कड़ी अमित जोगी को इस जघन्य हत्याकांड के मास्टरमाइंड के रूप में स्थापित करती है।

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फैसले की 5 बड़ी बातें:

  • सजा का ऐलान: अमित जोगी को धारा 120B (साजिश) के तहत उम्रकैद।
  • सरेंडर की समयसीमा: कोर्ट ने दोषी को 21 दिन (3 सप्ताह) के भीतर जेल अधिकारियों या संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।
  • बरी होने का फैसला रद्द: 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट द्वारा दी गई ‘संदेह के लाभ’ की दलील को हाई कोर्ट ने खारिज किया।
  • समान साक्ष्य: कोर्ट ने माना कि जब अन्य 28 आरोपियों को उन्हीं साक्ष्यों पर सजा मिली, तो मुख्य साजिशकर्ता को अलग नहीं रखा जा सकता।
  • राजनीतिक प्रभाव: कोर्ट ने टिप्पणी की कि घटना के समय अमित जोगी ‘कमांडिंग पोजीशन’ में थे।

घटना का इतिहास: 4 जून 2003 की वो खूनी रात

यह मामला उस समय का है जब छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के तत्कालीन कोषाध्यक्ष और कद्दावर नेता रामअवतार जग्गी की रायपुर के मौदहापारा इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जग्गी परिवार ने शुरू से ही तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया था।

मामले की जांच पहले राज्य पुलिस ने की, लेकिन बाद में इसे CBI को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में अमित जोगी को मुख्य आरोपी बनाया था। 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 लोगों को सजा सुनाई, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया, जिसके खिलाफ जग्गी परिवार और सीबीआई ने हाई कोर्ट में अपील की थी।

अमित जोगी का पक्ष: “सुप्रीम कोर्ट में मांगेंगे न्याय”

हाई कोर्ट के इस झटके के बाद अमित जोगी ने आज ही सुप्रीम कोर्ट (SC) का रुख किया है। उनके प्रवक्ता के अनुसार, “हाई कोर्ट ने केवल 40 मिनट की सुनवाई में फैसला सुना दिया और अमित जोगी को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।” अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वे अपनी बेगुनाही के लिए देश की सबसे बड़ी अदालत में लड़ाई जारी रखेंगे।

पढ़ें: अमित जोगी की सुप्रीम कोर्ट में अपील की पूरी कॉपी

सतीश जग्गी की जीत: “23 साल का संघर्ष सफल”

रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी, जो पिछले दो दशकों से अपने पिता के न्याय के लिए दर-दर भटके, आज बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “आज मेरे पिता की आत्मा को शांति मिली है। यह जीत केवल मेरी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो अन्याय के खिलाफ लड़ रहा है। अमित जोगी ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर सच को दबाने की कोशिश की, लेकिन आज कानून की जीत हुई है।”

— प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क के लिए अंबिकापुर से आशीष सिन्हा की रिपोर्ट —


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