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जगदलपुर महारानी अस्पताल: आयुष्मान योजना से कैंसर पीड़ितों को मिला नया जीवन | Success Stories






महारानी अस्पताल जगदलपुर: आयुष्मान भारत से कैंसर पीड़ितों को मिली नई जिंदगी


जगदलपुर | 08 अप्रैल 2026

महारानी अस्पताल और आयुष्मान भारत: कैंसर के विरुद्ध जंग में आर्थिक तंगी पर भारी पड़ा ‘साहस’

जगदलपुर: चिकित्सा विज्ञान के इस दौर में जहाँ कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ न केवल शरीर को छलनी करती हैं, बल्कि परिवारों को आर्थिक रूप से भी तोड़ देती हैं, वहीं बस्तर का महारानी अस्पताल और आयुष्मान भारत योजना एक मसीहा बनकर उभरे हैं। यहाँ संसाधनों की कमी पर मरीजों का जीवट और सरकारी सुविधाओं का साथ भारी पड़ रहा है।

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“कैंसर केवल एक शारीरिक बीमारी नहीं है, यह एक आर्थिक सुनामी भी है। लेकिन जब सरकारी योजना का हाथ साथ हो, तो जीत निश्चित है।”

25 लाख खर्च के बाद ‘आयुष्मान’ बना सहारा: अनीता की कहानी

किराना दुकान चलाने वाली अनीता महावर का संघर्ष प्रेरणा से भरा है। कैंसर के चौथे चरण से जूझ रही अनीता ने हैदराबाद में इलाज के दौरान अपनी जीवन भर की कमाई—करीब 20 से 25 लाख रुपये—खर्च कर दिए। जब स्थिति बेहद नाजुक हुई, तब आयुष्मान कार्ड ने उन्हें सहारा दिया।

पिछले दो वर्षों से वे जगदलपुर के महारानी अस्पताल में ही इलाज करा रही हैं। उनका कहना है कि यहाँ मिलने वाली निशुल्क दवाओं और डॉक्टरों के समर्पण ने उन्हें मौत के डर से बाहर निकालकर सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया है।

जब रक्षक ही मरीज बना: नर्सिंग मेट्रन लक्ष्मी टांडिया की जंग

महारानी अस्पताल में ही नर्सिंग मेट्रन के पद पर कार्यरत लक्ष्मी टांडिया स्वयं ओवरी कैंसर से लड़ रही हैं। सालों तक बाहर महंगे इलाज पर बड़ी राशि खर्च करने के बाद, अब वे पिछले डेढ़ महीने से आयुष्मान योजना के तहत इसी अस्पताल में उपचार ले रही हैं। उनका अनुभव बताता है कि जो महंगी दवाइयां बाहर आम आदमी की पहुंच से दूर हैं, वे यहाँ सुलभता से उपलब्ध हैं।

अस्पताल में उपलब्ध मुख्य सुविधाएँ

सुविधा मरीजों को लाभ
निशुल्क दवाइयां कीमोथेरेपी और कैंसर की महंगी दवाइयां पूरी तरह मुफ्त।
आयुष्मान भारत कवरेज लाखों रुपये का इलाज बिना किसी नकद भुगतान के।
स्थानीय उपचार बाहर जाने का यात्रा खर्च और मानसिक तनाव में कमी।

इन महिलाओं के अनुभवों से स्पष्ट है कि अब संसाधनों की कमी किसी के इलाज में बाधा नहीं बनेगी। महारानी अस्पताल आज केवल एक चिकित्सा केंद्र नहीं, बल्कि बस्तर के आम आदमी के लिए विश्वास और नई जिंदगी का एक मंच बन चुका है।


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