वीर सावरकर जयंती: प्रधानमंत्री मोदी ने महान क्रांतिकारी को किया नमन, देश भर में कार्यक्रम आयोजित





वीर सावरकर जयंती: प्रधानमंत्री मोदी ने महान क्रांतिकारी को किया नमन, देश भर में कार्यक्रम आयोजित


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वीर सावरकर जयंती: प्रधानमंत्री मोदी ने महान क्रांतिकारी को किया नमन, देश भर में श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है जयंती

नई दिल्ली: आज 28 मई 2026 को पूरे भारत में महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी विचारक विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें ‘वीर सावरकर’ के नाम से जाना जाता है, की जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद किया।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने संदेश में वीर सावरकर के योगदान को रेखांकित करते हुए लिखा:

“वीर सावरकर को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूँ। उनका साहस और देशभक्ति हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी। उनकी बौद्धिकता और सामाजिक सुधारों पर जोर भी उल्लेखनीय है।”

प्रधानमंत्री ने सावरकर के व्यक्तित्व को वीरता और बौद्धिकता का अद्भुत संगम बताया, जो आने वाली हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

वीर सावरकर का जीवन: संघर्ष और साहस की गाथा

विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भागुर गांव में हुआ था। उनके जीवन का हर क्षण राष्ट्र की स्वतंत्रता और उत्थान के लिए समर्पित था।

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1. क्रांतिकारी आंदोलन में भूमिका

सावरकर ने 1904 में ‘अभिनव भारत सोसाइटी’ की स्थापना की थी। लंदन में रहते हुए उन्होंने ‘इंडिया हाउस’ के जरिए भारतीय छात्रों में आजादी की अलख जगाई। उनकी पुस्तक ‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857’ ने इतिहास को देखने का नजरिया बदला और 1857 के विद्रोह को ‘प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ के रूप में स्थापित किया।

2. काला पानी की यातनाएं

ब्रिटिश शासन ने उन्हें दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसके तहत उन्हें अंडमान की सेलुलर जेल (काला पानी) भेजा गया। यहाँ उन्होंने अकल्पनीय यातनाएं सही, लेकिन उनका राष्ट्रप्रेम कभी कम नहीं हुआ। जेल की दीवारों पर उन्होंने कोयले से कविताएं लिखीं और उन्हें याद रखा।

3. सामाजिक सुधार और हिंदुत्व का दर्शन

सावरकर केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक प्रगतिशील समाज सुधारक भी थे। रत्नागिरी में नजरबंदी के दौरान उन्होंने छुआछूत जैसी कुरीतियों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने ‘पतित पावन मंदिर’ का निर्माण करवाया, जहाँ समाज के हर वर्ग के लोगों को प्रवेश और पूजा का समान अधिकार प्राप्त था।

अन्य नेताओं द्वारा श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीर सावरकर को “स्वतंत्रता संग्राम का निर्भय सेनानी” बताते हुए कहा कि उनके ओजस्वी विचारों ने करोड़ों युवाओं में देशभक्ति की लौ जलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनके बलिदान और त्याग को नमन करते हुए उन्हें राष्ट्र का अमर पुत्र बताया।

वीर सावरकर की जयंती केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराने का दिन है। उनका जीवन, संघर्ष और राष्ट्रवाद का दर्शन आज भी करोड़ों भारतीयों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।