#ThursdayThriller: गरीबी की गलियों से निकलकर विश्व मंच तक – एक अजेय योद्धा के 12 वर्षों का संकल्प
नई दिल्ली: एक ऐसे दौर में जब देश नीतिगत पंगुता और निराशा के घेरे में था, 26 मई 2014 को एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। गरीबी की गलियों से निकलकर, चाय की भट्टी से उठकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में न केवल ‘सरकार’ चलाई, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के भीतर एक नया आत्मविश्वास और राष्ट्रवाद की भावना फूंकी है। आज की #ThursdayThriller विशेष रिपोर्ट में, हम उस संघर्ष, संकल्प और सेवा की गाथा का विश्लेषण कर रहे हैं जिसने भारत की दिशा और दशा दोनों बदल दी।
1. एक ऐतिहासिक बदलाव (2014-2026)
जब 2014 में प्रधानमंत्री ने कार्यभार संभाला, तब देश भ्रष्टाचार और घोटालों से त्रस्त था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में, भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्रांति, रक्षा और विदेश नीति के क्षेत्र में जो छलांग लगाई है, वह अभूतपूर्व है। वंदे भारत ट्रेनों से लेकर एक्सप्रेसवे और आधुनिक एयरपोर्ट्स तक, भारत आज ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए वैश्विक उत्पादन का केंद्र बन रहा है।
2. सुरक्षा और गौरव: लाल चौक से कारगिल तक
सुरक्षा के मोर्चे पर प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल निर्णायक रहा है। 2019 में अनुच्छेद 370 का निरस्त होना और जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। लाल चौक पर तिरंगा फहराना हो या कारगिल के बर्फीले पहाड़ों पर सेना का मनोबल बढ़ाना, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
3. आत्मविश्वास का 140 करोड़ भारतीयों का भारत
प्रधानमंत्री का मंत्र रहा है—’सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’।
- डिजिटल इंडिया: यूपीआई (UPI) ने दुनिया के सामने भारत की तकनीकी शक्ति का लोहा मनवाया है।
- कल्याणकारी योजनाएं: जन-धन योजना, उज्ज्वला, और आयुष्मान भारत ने अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ा है।
- सांस्कृतिक पुनर्जागरण: अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा ने देश के गौरव और सांस्कृतिक जड़ों को फिर से पुनर्जीवित किया है।
4. वैश्विक मंच पर ‘सेंटर स्टेज’
आज दुनिया भारत को केवल एक विकासशील देश नहीं, बल्कि एक ‘ट्रस्टेड पार्टनर’ और उभरती हुई महाशक्ति के रूप में देखती है। जी20 की अध्यक्षता हो या वैश्विक संकटों के समय भारत का मध्यस्थ की भूमिका निभाना—भारत अब विश्व की राजनीति में ‘सेंटर स्टेज’ पर है।
5. आत्मनिर्भर भारत: एक नया भविष्य
‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प महज एक नारा नहीं, बल्कि भारत की औद्योगिक और रक्षा क्षमताओं को स्वावलंबी बनाने की एक प्रक्रिया है। सेमीकंडक्टर निर्माण से लेकर स्पेस सेक्टर तक, भारत की बढ़ती ताकत विश्व के लिए आश्चर्य का विषय है।
विकसित भारत @ 2047 की ओर
प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के इस कार्यकाल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘सभ्यतागत और विकासात्मक यात्रा का रूपांतरण’ कहा है। यह केवल सड़कों और पुलों का निर्माण नहीं, बल्कि 140 करोड़ लोगों की सोच में आए बदलाव की कहानी है। जो भारत कभी पीछे रहकर दूसरों को देखता था, वह अब स्वयं दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।
(यह रिपोर्ट पिछले 12 वर्षों की विकास यात्रा के प्रमुख मील के पत्थरों पर आधारित है। संघर्ष और राष्ट्रसेवा की यह गाथा जारी है।)










