सक्ती हादसा: “FIR सार्वजनिक करे सरकार, लीपा-पोती बर्दाश्त नहीं”— भूपेश बघेल ने 20 मौतों पर प्रशासन को घेरा
रायपुर: छत्तीसगढ़ का सक्ती जिला आज एक बेहद दर्दनाक हादसे का गवाह बना, जहाँ 20 लोगों की जान चली गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। अब इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उनका आरोप है कि इस मामले में FIR तो दर्ज कर ली गई है, लेकिन सरकार इसे सार्वजनिक नहीं कर रही है।
— भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री
लीपा-पोती का पुराना इतिहास: बघेल का रमन सरकार पर निशाना
भूपेश बघेल ने इस हादसे की तुलना साल 2009 में कोरबा के बालको (वेदांता) में हुए चिमनी हादसे से की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी तकरीबन 40 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन तत्कालीन भाजपा की रमन सरकार ने मामले में लीपा-पोती कर दी थी। बघेल ने आरोप लगाया कि उस वक्त कंपनी के मालिकों और बड़े ठेकेदारों को बचाने के लिए रमन सरकार ने पूरी ताकत लगा दी थी।
फ्लैशबैक: 2009 बालको हादसा
सितंबर 2009 में कोरबा के बालको प्लांट में निर्माणाधीन चिमनी गिरने से 40 से अधिक मजदूरों की मौत हो गई थी। वह देश के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक था। बघेल का कहना है कि सक्ती हादसे में भी वैसी ही ‘लीपा-पोती’ की गंध आ रही है।
“कोई कितना भी बड़ा हो, कार्रवाई होनी चाहिए”
पूर्व मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि इस बार जनता चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने मांग की है कि FIR में किन बड़े अधिकारियों, मालिकों और ठेकेदारों के नाम हैं, उसे तुरंत सार्वजनिक किया जाए। बघेल ने सरकार को चेतावनी दी है कि चाहे अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो, 20 गरीबों की जान की कीमत उसे चुकानी होगी।
जनता का हक और पारदर्शिता
भूपेश बघेल के अनुसार, लोकतंत्र में जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनकी सुरक्षा में चूक करने वालों पर प्रशासन क्या कदम उठा रहा है। FIR छिपाना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं पर्दे के पीछे किसी बड़े नाम को बचाने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और मृतक परिवारों के लिए भारी मुआवजे की मांग की है।
सक्ती जिले में इस वक्त मातम का माहौल है और प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। अब देखना यह होगा कि बघेल के इस सीधे हमले के बाद सरकार FIR सार्वजनिक करती है या नहीं।








