मध्यप्रदेश बनेगा कृषि और दुग्ध क्षेत्र का सिरमौर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया ‘किसान कल्याण वर्ष’ का शंखनाद
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता के नाम अपने विशेष संदेश में मध्यप्रदेश के किसानों के लिए कई ऐतिहासिक और क्रांतिकारी घोषणाएं की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समृद्ध किसान ही ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण की आधारशिला रखेंगे और मध्यप्रदेश सरकार इस वर्ष को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में समर्पित कर रही है।
मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं एक नजर में
- गेहूं उपार्जन लक्ष्य में वृद्धि: अब 78 लाख के बजाय 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जाएगा।
- स्लॉट बुकिंग और समय सीमा: गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग अब 9 मई 2026 तक खुली रहेगी। अब सप्ताह में 6 दिन (शनिवार सहित) खरीदी होगी।
- 4 गुना मुआवजा: भू-अर्जन के बदले अब किसानों को उनकी भूमि का 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा।
- बोनस का एलान: उड़द की फसल पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि दी जाएगी।
सिंचाई और बिजली में आत्मनिर्भर होंगे किसान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के किसानों को अब रात के बजाय दिन में सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली दी जाएगी। कृषक मित्र योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है ताकि किसान ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।
मध्यप्रदेश बनेगा ‘मिल्क कैपिटल’
पशुपालन को आय का मुख्य जरिया बनाने के उद्देश्य से प्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की तैयारी है। डॉ. यादव ने बताया कि 1,752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया गया है और किसानों को दूध का दाम प्रति किलो 8 से 10 रुपये बढ़कर मिल रहा है। अब तक दुग्ध उत्पादकों को 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
उर्वरक की सुगम उपलब्धता
वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद प्रदेश में यूरिया की उपलब्धता 5.90 लाख मीट्रिक टन है, जो पिछले वर्ष से अधिक है। वितरण प्रणाली को तकनीक से जोड़कर सरल बनाया गया है ताकि किसानों को बिना लाइन लगाए खाद मिल सके।
“किसानों की समृद्धि ही मध्यप्रदेश की असली ताकत है। उनकी मेहनत, पसीना और भविष्य हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
– डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश






