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पीएम मोदी का नीदरलैंड दौरा: ऊर्जा और जल सुरक्षा पर भारत-डच रणनीतिक साझेदारी मजबूत, प्रवासियों को बताया ‘जीवंत सेतु’






‘ट्यूलिप और कमल’ की साझेदारी: द हेग में पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा बयान; भारत-नीदरलैंड मिलकर बनाएंगे फ्यूचर-रेडी सप्लाई चेन | Pradesh Khabar


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‘ट्यूलिप और कमल’ का अनोखा मेल: नीदरलैंड में बोले पीएम नरेंद्र मोदी- मिट्टी हो या पानी, सही पोषण मिले तो दोनों खिलते हैं; वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-डच रणनीतिक साझेदारी मजबूत

अंतरराष्ट्रीय कवरेज: प्रदेश खबर न्यूज नेटवर्क |
स्थान: द हेग (नीदरलैंड) |
दिनांक: 16 मई, 2026

द हेग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक बेहद खूबसूरत और दार्शनिक उपमा के जरिए परिभाषित किया है। द हेग में आयोजित विशेष सामुदायिक कार्यक्रम और बैठकों के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि नीदरलैंड का राष्ट्रीय प्रतीक ‘ट्यूलिप’ और भारत का राष्ट्रीय गौरव ‘कमल’ हमें एक बड़ा संदेश देते हैं। जड़ें चाहे पानी में हों या मिट्टी में, अगर उन्हें सही पोषण और अनुकूल माहौल मिले, तो दोनों ही पूरी भव्यता के साथ खिलते हैं। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यही दर्शन और साझा मूल्य भारत तथा नीदरलैंड की मजबूत द्विपक्षीय साझेदारी की असली बुनियाद हैं, जो आज के अनिश्चित वैश्विक माहौल में पूरी दुनिया को स्थिरता का संदेश दे रहे हैं।

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वैश्विक चुनौतियों के बीच ‘फ्यूचर-रेडी सप्लाई चेन’ पर बड़ा दांव

वर्तमान समय में दुनिया के सामने मौजूद विभिन्न भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच उभरते रणनीतिक तालमेल की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया कई तरह की वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, तब भारत और नीदरलैंड मिलकर भविष्य के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद सप्लाई चेन (Future-Ready Supply Chains) का निर्माण कर रहे हैं।

इस रणनीतिक साझेदारी का दायरा अब पारंपरिक व्यापार से काफी आगे निकल चुका है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) से लेकर जल सुरक्षा (Water Security) जैसे संवेदनशील और दूरगामी महत्व वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ मिलकर बेहद करीब से काम कर रहे हैं। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर चिप्स, ग्रीन हाइड्रोजन और अत्याधुनिक तकनीकी अनुसंधान में दोनों देशों का बढ़ता सहयोग वैश्विक मंच पर एक नया मील का पत्थर साबित हो रहा है।

“ट्यूलिप और कमल हमें याद दिलाते हैं कि जड़ें चाहे पानी में हों या मिट्टी में, सही पोषण मिलने पर वे खिल उठते हैं। यही हमारी साझेदारी का आधार है। आज की कई वैश्विक चुनौतियों के बीच, भारत और नीदरलैंड भविष्य के लिए तैयार आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा से लेकर जल सुरक्षा तक, दोनों देश निकटता से सहयोग कर रहे हैं।”
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोशल मीडिया पर साझा संदेश)

प्रवासी भारतीय: दोनों देशों के बीच एक जीवंत और धड़कता हुआ सेतु

द हेग में भारतीय समुदाय के साथ हुए संवाद से अभिभूत प्रधानमंत्री ने प्रवासियों की उपलब्धताओं की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि नीदरलैंड में रह रहा भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक ‘जीवंत पुल’ (Vibrant Bridge) की तरह काम कर रहा है। प्रवासियों ने न केवल डच समाज और वहां की अर्थव्यवस्था में अपनी प्रतिभा और कड़े परिश्रम के दम पर एक सम्मानित स्थान बनाया है, बल्कि अपनी जड़ों के साथ भी उनका जुड़ाव उतना ही अटूट है।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह देखना बेहद सुखद और गर्व से भर देने वाला है कि सात समंदर पार होने के बाद भी भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और उसके संस्कार इन प्रवासियों के दिलों में पूरी जीवंतता के साथ धड़क रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत किए गए पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि दूरी चाहे कितनी भी हो, भारतीयता की भावना को कभी कम नहीं किया जा सकता।

सहयोग का क्षेत्र रणनीतिक महत्व और प्रगति (मई 2026)
सप्लाई चेन (Supply Chain) वैश्विक व्यवधानों से निपटने के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और भविष्य के अनुकूल आपूर्ति श्रृंखला का विकास।
ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान और निवेश।
जल सुरक्षा (Water Security) डच जल प्रबंधन तकनीकों और भारत के ‘जल जीवन मिशन’ के बीच रणनीतिक साझेदारी।
सांस्कृतिक सेतु (Diaspora) मुख्य भूमि यूरोप में सबसे बड़े भारतीय समुदाय (लगभग 2.9 लाख प्रवासी) के जरिए संबंधों को मजबूती।

द्विपक्षीय वार्ता में शामिल होंगे ये बड़े मुद्दे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा के दौरान डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन (Rob Jetten) और शाही परिवार के साथ होने वाली उच्च स्तरीय वार्ताओं में इन प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर उतारने का पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) के संपन्न होने के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व इस तरह की गहन रणनीतिक वार्ता कर रहे हैं। डच कंपनियों की ओर से भारत के विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद की जा रही है, जिससे भारत की वैश्विक विनिर्माण हब बनने की राह और आसान होगी।


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