भारत-साइप्रस दोस्ती में नया मील का पत्थर: द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ में बदलने का ऐतिहासिक फैसला, रक्षा, व्यापार और निवेश दोगुना करने का खाका तैयार
नई दिल्ली: भारत और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के प्रमुख देश साइप्रस के बीच कूटनीतिक संबंधों को एक नई दिशा और अभूतपूर्व रफ्तार मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर आए साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की व्यापक वार्ता की। दोनों वैश्विक नेताओं के बीच यह मुलाकात दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और क्षेत्रीय संप्रभुता के प्रति आपसी सम्मान की मजबूत नींव पर आधारित रही।
बैठक के तुरंत बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए इस मुलाकात पर बेहद खुशी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और साइप्रस की यह दोस्ती केवल पारंपरिक नहीं, बल्कि एक बेहद मजबूत और भविष्योन्मुखी (Futuristic) साझेदारी है। दोनों देशों ने वैश्विक और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ में बदलने का संकल्प लिया है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के नागरिकों के लिए सुरक्षा, समृद्धि और व्यापार के नए द्वार खुलेंगे।
📊 अगले 5 वर्षों में निवेश दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य
प्रेस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रहे आर्थिक और व्यावसायिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि साइप्रस आज भारत में निवेश करने वाले दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शुमार है। पिछले एक दशक (Past Decade) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साइप्रस से भारत में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करीब दोगुना हो चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था पर साइप्रस के व्यापारिक जगत के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।
इस आर्थिक गति को और अधिक विस्तार देने के लिए दोनों देशों ने एक साहसिक आर्थिक रोडमैप तैयार किया है। इसी साल की शुरुआत में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का जिक्र करते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि इसने निवेश और व्यापार के असीमित अवसर खोले हैं। इस नए कूटनीतिक और आर्थिक माहौल का लाभ उठाते हुए दोनों देशों ने आगामी 5 वर्षों के भीतर आपसी निवेश प्रवाह को एक बार फिर से दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
🤝 हैदराबाद हाउस में हुए प्रमुख द्विपक्षीय समझौते (MoUs)
- काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप: आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा पार सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए दोनों देशों ने एक समर्पित ‘संयुक्त कार्य समूह’ (Joint Working Group on Counter-Terrorism) स्थापित करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- साइबर और समुद्री सुरक्षा का अपग्रेड: पूर्वी भूमध्य सागर में साइप्रस की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए साइबर सुरक्षा और मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (समुद्री सुरक्षा तंत्र) के क्षेत्र में सहयोग का दायरा बढ़ाया जाएगा।
- फिनटेक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत के यूपीआई (UPI) और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को साइप्रस के वित्तीय केंद्रों से जोड़ने और गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City) को एक वैश्विक वित्तीय हब के रूप में मिलकर विकसित करने पर सहमति बनी।
- माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौता: दोनों देशों में काम कर रहे पेशेवरों, शोधकर्ताओं और छात्रों के अधिकारों की रक्षा और वैध आवाजाही को सुगम बनाने के लिए जल्द ही एक व्यापक ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप’ और ‘सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट’ को अंतिम रूप दिया जाएगा।
- उच्च शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान: शैक्षणिक डिग्रियों की पारस्परिक मान्यता, संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान और सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण के लिए विशेष समझौतों का आदान-प्रदान किया गया।
🗺️ ‘Friends of IMEC’ और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पहल
इस मुलाकात के दौरान कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को एक ‘दूरदर्शी और युगांतरकारी पहल’ बताते हुए भारत को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर इंडो-पैसिफिक, मिडिल ईस्ट और यूरोप को आपस में जोड़ने वाला सबसे विश्वसनीय और सुरक्षित माध्यम बनेगा।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स ने घोषणा की कि साइप्रस ने यूरोपीय संघ के भीतर इस गलियारे को तेजी से आगे बढ़ाने और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए **’फ्रेंड्स ऑफ आईएमईसी’ (Friends of IMEC)** समूह का गठन किया है। साइप्रस भूमध्य सागर में अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर भारत के लिए यूरोप में प्रवेश का एक विश्वसनीय, स्थिर और सुरक्षित कूटनीतिक सेतु (Bridge to Europe) बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।
📈 भारत-साइप्रस कूटनीतिक संबंध (एक नजर में)
| मुख्य विषय | वर्तमान स्थिति / नीतिगत निर्णय (2026) | भावी लक्ष्य / रणनीतिक महत्व |
|---|---|---|
| साझेदारी का स्तर | पारंपरिक मित्रता से उन्नत | औपचारिक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) |
| निवेश (Investment) | पिछले 10 वर्षों में भारत में निवेश दोगुना हुआ | अगले 5 वर्षों में निवेश प्रवाह को दोबारा दोगुना करना |
| यूरोपीय संघ (EU) संदर्भ | भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू | 2 अरब लोगों के बाजार में साइप्रस बनेगा भारत का प्रवेश द्वार |
| कनेक्टिविटी | IMEC कॉरिडोर का पूर्ण समर्थन | साइप्रस द्वारा ‘Friends of IMEC’ समूह की स्थापना |
| सुरक्षा सहयोग | सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा आदान-प्रदान | साइबर सुरक्षा, काउंटर-टेररिज्म और समुद्री सुरक्षा में विस्तार |
| राजनयिक वर्षगांठ | मजबूत ऐतिहासिक संबंध | वर्ष 2027 में दोनों देश मनाएंगे कूटनीतिक संबंधों के 65 वर्ष |
🌍 वैश्विक मंचों पर सुधार और शांति की अपील
द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा, दोनों राजनेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे मौजूदा संघर्षों सहित वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर भी गहन चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स ने साझा बयान में दोहराया कि दोनों देश किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता (Sovereignty & Territorial Integrity) का पूर्ण सम्मान करते हैं और सभी अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध के बजाय कूटनीति और बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
इसके साथ ही दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित प्रमुख वैश्विक संस्थाओं में समकालीन वास्तविकताओं के अनुसार तत्काल और अर्थपूर्ण सुधार किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उभरती हुई वैश्विक चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
🎖️ मुंबई से दिल्ली तक का दौरा और भव्य स्वागत
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की यह भारत यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है। राष्ट्रपति के रूप में यह उनकी पहली भारत यात्रा है, जो प्रधानमंत्री मोदी की जून 2025 की साइप्रस यात्रा के ठीक एक साल के भीतर हो रही है। अपनी यात्रा के पहले चरण में राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स देश की वित्तीय राजधानी मुंबई पहुंचे थे, जहां महाराष्ट्र के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उनका भव्य स्वागत किया था। मुंबई में उन्होंने एक हाई-प्रोफाइल बिजनेस फोरम का नेतृत्व किया, जिसमें वैश्विक नौवहन (Shipping), लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाओं से जुड़े भारतीय उद्योगपतियों को साइप्रस में निवेश के लिए आमंत्रित किया गया।
दिल्ली आगमन पर शुक्रवार सुबह विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उनसे शिष्टाचार मुलाकात की, जिसके बाद राष्ट्रपति ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता और पीएम मोदी द्वारा आयोजित दोपहर के भोज के बाद, राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स शाम को राष्ट्रपति भवन का रुख करेंगे। वहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनका औपचारिक स्वागत करेंगी और उनके सम्मान में एक राजकीय भोज (State Banquet) की मेजबानी करेंगी। वर्ष 2027 में अपने राजनयिक संबंधों के 65 वर्ष पूरे करने जा रहे दोनों देशों के लिए यह यात्रा वाकई एक नए स्वर्ण युग की शुरुआत मानी जा रही है।










