The Ultimate Survival Guide for Heat Wave
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) की विशेष एडवाइजरी: लू के प्रकोप से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
नई दिल्ली: भारत के कई हिस्सों में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी हालिया अलर्ट के बाद, भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting – MIB) ने नागरिकों को गंभीर लू (Heatwave) के खतरों से सुरक्षित रखने के लिए एक आधिकारिक इंफोग्राफिक गाइडलाइन ‘The Ultimate Survival Guide for Heat Wave’ जारी की है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया हैंडल पर संदेश साझा करते हुए कहा है कि “हीटवेव के दौरान छोटी-छोटी सावधानियां भी बड़ा फर्क ला सकती हैं।”
मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के 5 मुख्य बिंदु (Key Takeaways):
यात्रा के दौरान हाइड्रेटेड रहें (Stay hydrated while travelling)
जब भी आप घर से बाहर निकलें या यात्रा कर रहे हों, तो अपने पास पानी की बोतल अवश्य रखें और थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें।
घरों के अंदर या छांव में रहें (Stay cool indoors or in shade)
दोपहर के समय सीधी धूप में निकलने से बचें। जितना संभव हो, एयर-कंडीशंड, वेंटिलेटेड कमरों में या पेड़ों की घनी छांव में समय बिताएं।
हल्के रंग के कपड़े और हेडगियर का प्रयोग करें (Wear light coloured clothes and protect yourself with headgear)
ढीले, सूती और हल्के रंग के वस्त्र पहनें जो पसीना सोखने में मदद करें। धूप से सिर और चेहरे को बचाने के लिए हैट, कैप, गमछा या छतरी का उपयोग करें।
ORS और घरेलू पेय पदार्थों का सेवन करें (Use ORS and homemade drinks)
शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने के लिए ओआरएस (ORS) घोल, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और आम पन्ना जैसे पारंपरिक पेय पिएं।
पानी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं (Eat water-based fruits and vegetables)
तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा और अंगूर जैसे अत्यधिक जल सामग्री (Water Content) वाले मौसमी फल-सब्जियों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।
हीटवेव क्या है और यह क्यों खतरनाक है?
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब किसी मैदानी इलाके का अधिकतम तापमान कम से कम 40°C या उससे अधिक और पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान कम से कम 30°C तक पहुंच जाता है, तो उसे हीटवेव (लू) की स्थिति माना जाता है। यदि तापमान सामान्य से 4.5°C से 6.4°C अधिक हो जाए, तो यह ‘गंभीर हीटवेव’ (Severe Heatwave) की श्रेणी में आता है।
अत्यधिक गर्मी के कारण मानव शरीर अपने आंतरिक तापमान (Core Body Temperature) को नियंत्रित करने में विफल होने लगता है। इसके कारण डिहाइड्रेशन, हीट थकावट (Heat Exhaustion) और सबसे खतरनाक स्थिति यानी हीट स्ट्रोक (Heat Stroke / लू लगना) का खतरा बढ़ जाता है, जो जानलेवा भी हो सकता है।
हीटवेव एक्शन प्लान: क्या करें और क्या न करें?
मंत्रालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित निवारक उपायों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| ✅ क्या करें (Dos) | ❌ क्या न करें (Don’ts) |
|---|---|
| प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीते रहें। | दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे के बीच सीधे सूर्य के प्रकाश में जाने से बचें। |
| घर से बाहर निकलते समय धूप का चश्मा, छतरी, टोपी और जूतों/चप्पलों का प्रयोग करें। | चाय, कॉफी, शराब और अत्यधिक चीनी वाले कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन न करें (ये डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं)। |
| अपने घर की खिड़कियों पर पर्दे या रिफ्लेक्टर लगाएं और रात में खिड़कियां खुली रखें। | खड़ी गाड़ियों के अंदर बच्चों या पालतू जानवरों को अकेला कभी न छोड़ें, अंदर का तापमान तेजी से घातक स्तर तक बढ़ सकता है। |
| स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान और रेडियो/टीवी/सोशल मीडिया पर आने वाले अलर्ट्स पर नजर रखें। | अत्यधिक प्रोटीन युक्त, तैलीय, मसालेदार या बासी भोजन करने से बचें। |
| यदि आप बाहर काम करते हैं, तो बार-बार छांव वाली जगहों पर आराम करें और भारी काम ठंडे समय (सुबह या शाम) में करें। | गर्मियों के सबसे गर्म घंटों के दौरान वेंटिलेशन के बिना बंद रसोई में खाना पकाने से बचें। |
सावधान! लू (Heat Stroke) के इन आपातकालीन लक्षणों को पहचानें:
यदि आपके या आपके आस-पास किसी व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या नजदीकी अस्पताल ले जाएं:
- अत्यधिक उच्च शरीर का तापमान (104°F या 40°C से अधिक)
- तेज सिरदर्द, चक्कर आना या बेहोशी आना
- त्वचा का लाल, गर्म और सूखा हो जाना (पसीना आना बंद होना)
- जी मिचलाना या उल्टी होना
- तेज धड़कन और सांस लेने में तकलीफ
- मानसिक भ्रम या भ्रमित बातचीत
आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा: डॉक्टर के आने तक मरीज को तुरंत किसी ठंडी या छांव वाली जगह पर ले जाएं। गीले कपड़े से शरीर को पोंछें (Sponging) और यदि वह होश में हो, तो उसे ठंडा पानी या ORS दें।
कमजोर और संवेदनशील समूहों (Vulnerable Groups) का रखें विशेष ख्याल
गर्मी का प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग होता है, लेकिन समाज के कुछ वर्गों को इस मौसम में अत्यधिक देखभाल की आवश्यकता होती है:
- शिशु और छोटे बच्चे: उनका शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से डिहाइड्रेट होता है। उन्हें सीधे धूप से दूर रखें और मां का दूध या ओआरएस देते रहें।
- बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति: विशेष रूप से वे लोग जो हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या किडनी की बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें नियमित अंतराल पर पानी और दवाएं लेनी चाहिए।
- बाहर काम करने वाले मजदूर (Outdoor Workers): निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों, रेहड़ी-पटरी वालों और यातायात पुलिस कर्मियों को नियोक्ताओं द्वारा पर्याप्त आराम, पीने का पानी और शेड (छांव) की व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा सोशल मीडिया पर इस इंफोग्राफिक को जारी करने का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर जन-जागरूकता फैलाना है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हीटवेव की घटनाएं साल-दर-साल अधिक तीव्र और लंबी होती जा रही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा जारी की गई इस सर्वाइवल गाइड का पालन करके न केवल हम स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी इस प्राकृतिक प्रकोप से बचा सकते हैं। याद रखें, ‘बीट द हीट’ (#BeatTheHeat) का मंत्र बेहद सरल है: सतर्क रहें, हाइड्रेटेड रहें और ठंडे रहें!











