छत्तीसगढ़ में उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित: खरीफ सीजन के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य
रायपुर, 26 मई 2026: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण उर्वरक आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की है।
उर्वरक की वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना
वर्तमान में राज्य के गोदामों और सोसायटियों में 9.29 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद का स्टॉक उपलब्ध है, जो निर्धारित लक्ष्य का 60 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से, केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया है।
| उर्वरक का प्रकार | आवंटित लक्ष्य (मीट्रिक टन) |
|---|---|
| यूरिया | 7.25 लाख |
| डी.ए.पी. (DAP) | 3.00 लाख |
| एम.ओ.पी. (MOP) | 0.80 लाख |
| एन.पी.के. (NPK) | 2.50 लाख |
| एस.एस.पी. (SSP) | 2.00 लाख |
नैनो डीएपी: आधुनिक खेती की ओर एक कदम
कृषि विभाग ‘कृषि क्रांति की ओर एक कदम’ अभियान के तहत किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। यह कम लागत में बेहतर परिणाम देता है।
लागत में कमी: 50 किलो पारंपरिक डीएपी (1350 रुपये) की तुलना में, 25 किलो डीएपी एवं 500 मिली नैनो डीएपी के संयुक्त उपयोग से मात्र 1275 रुपये का खर्च आता है।
उपयोग की वैज्ञानिक विधि:
- प्रथम चरण: आधार खाद के रूप में 25 किलोग्राम डीएपी या अन्य संतुलित मिश्रित उर्वरक का प्रयोग करें।
- द्वितीय चरण: बीज उपचार के लिए 150 मिली नैनो डीएपी (3 लीटर पानी में) तथा पौध उपचार के लिए 250 मिली (50 लीटर पानी में) का उपयोग करें।
- तृतीय चरण: रोपाई के 30 दिन बाद 250 मिली नैनो डीएपी को 125 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
प्रशासनिक निगरानी और कालाबाजारी पर रोक
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी जिलों में उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए उड़नदस्ता दलों का गठन किया गया है। दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत दलहन-तिलहन फसलों के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।









