राजस्व ई-कोर्ट परियोजना: छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल न्याय की नई क्रांति
रायपुर, 3 जून 2026
छत्तीसगढ़ राज्य ने राजस्व प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और आमजन के लिए सहज बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। “राजस्व ई-कोर्ट परियोजना” अब केवल एक तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी नागरिकों के लिए न्याय प्राप्ति को सरल और त्वरित बनाने वाला एक प्रभावी माध्यम बन चुकी है।
प्रशासनिक जटिलताओं से मुक्ति
पहले नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और भूमि विवाद जैसे मामलों के लिए नागरिकों को तहसील और कलेक्टर कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे। बिचौलियों और भ्रष्टाचार के कारण आम आदमी परेशान था। अब ई-कोर्ट प्रणाली ने इस प्रक्रिया को “पेपरलेस” और “जनकेंद्रित” बना दिया है।
ई-कोर्ट व्यवस्था एक प्रभावी समाधान: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
सिस्टम की मुख्य विशेषताएं
- तत्काल डिजिटल पावती: आवेदन के साथ ही पंजीकरण और डिजिटल पावती की सुविधा।
- पूर्णतः ऑनलाइन प्रक्रिया: नोटिस जारी करने से लेकर अंतिम आदेश तक की कार्यवाही ऑनलाइन।
- पारदर्शिता: मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे केस की स्थिति और अगली पेशी की जानकारी।
- विवादित भूमि की जानकारी: भूमि खरीदने से पहले खसरा नंबर के माध्यम से विवादित स्थिति की ऑनलाइन जांच।
किसानों और ग्रामीण नागरिकों के लिए वरदान
ग्रामीण क्षेत्रों के किसान अब लोक सेवा केंद्र या मोबाइल फोन के जरिए ही अपने प्रकरणों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनके समय और धन की बचत हो रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
डिजिटल रिकॉर्ड के सुरक्षित होने से फाइलों के खोने या हेरफेर की संभावना समाप्त हो गई है। छत्तीसगढ़ की यह पहल ‘ई-गवर्नेंस’ को ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ में बदलने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो “गढ़बो नवा छत्तीसगढ़” के सपने को साकार कर रही है।











